Strait of Hormuz के मुद्दे पर अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी बहरीन के साथ खड़ा हो गया है। बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुललतीफ बिन राशिद अल-जयानी ने साफ कहा कि यह अब सिर्फ एक क्षेत्रीय समस्या नहीं रही, बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए सीधा खतरा बन गई है। ईरान द्वारा इस रास्ते को बंद करने या नियंत्रित करने की कोशिशों के बाद अब खाड़ी देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। इस संकट का असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापार पर भी पड़ रहा है।

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Strait of Hormuz का विवाद क्या है और इसका क्या असर होगा?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहाँ से तेल और गैस की बड़ी सप्लाई होती है। फरवरी 2026 के अंत से इस रास्ते पर तनाव बढ़ा हुआ है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और दुनिया भर में सामान महंगा होने की आशंका है। बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव रखा है जिसमें मांग की गई है कि इस रास्ते को सभी देशों के जहाजों के लिए खुला रखा जाए। भारत और अमेरिका सहित 130 से ज्यादा देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है क्योंकि इससे ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर सीधा असर पड़ता है।

UN सुरक्षा परिषद में अब तक क्या-क्या हुआ?

संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा जारी है और कई देशों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस संकट से जुड़ी कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

प्रमुख पक्ष हालिया स्थिति और रुख
बहरीन और UAE Strait of Hormuz को खोलने के लिए सुरक्षा परिषद से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव ने चेतावनी दी है कि स्थिति एक बड़े युद्ध की तरफ बढ़ रही है।
चीन और रूस प्रस्ताव में सैन्य बल के इस्तेमाल वाली भाषा का विरोध किया है, जिससे वोट टल गया है।
यूरोपीय संघ (EU) समुद्री रास्ते के लिए किसी भी तरह के ‘पे-टू-पास’ या टोल टैक्स वाली योजना को खारिज किया है।
GCC देश सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे देश एकजुट होकर समुद्री सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

प्रवासियों और आम जनता पर इस संकट का क्या प्रभाव पड़ेगा?

अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका सबसे ज्यादा असर खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों पर पड़ेगा। सप्लाई चेन टूटने से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं और ईंधन की कमी हो सकती है। UAE और बहरीन का कहना है कि यह मामला अब केवल सीमा विवाद नहीं है बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा और व्यापार से जुड़ा है। सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव पर वोटिंग अब अगले हफ्ते होने की उम्मीद है, क्योंकि रूस और चीन ने कुछ तकनीकी बिंदुओं पर आपत्ति जताई है। फिलहाल खाड़ी देशों ने अपनी रक्षात्मक तैयारी जारी रखी है।