UAE के बरकाह न्यूक्लियर प्लांट ने एक बड़ा संकट झेला लेकिन फिर भी मजबूती से खड़ा रहा। अब यह प्लांट सिर्फ बिजली ही नहीं बल्कि आने वाले समय की सबसे बड़ी तकनीक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने में मदद करेगा। सरकार अब अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक और न्यूक्लियर प्लांट बनाने की तैयारी कर रही है।

ड्रोन हमला और सुरक्षा का मामला

17 मई 2026 को बरकाह प्लांट के बाहरी पावर सिस्टम पर ड्रोन हमला हुआ था। इस घटना के बाद पूरी दुनिया की नजरें UAE पर थीं, लेकिन प्लांट के ऑपरेटरों ने सूझबूझ से काम लिया। IAEA के डायरेक्टर जनरल रफाल ग्रॉसी ने इसकी तारीफ की और पुष्टि की कि कोई रेडियोलॉजिकल इमरजेंसी नहीं हुई। इसके बाद 7 जून 2026 को UAE ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग की कि दुनिया भर में शांतिपूर्ण न्यूक्लियर केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाई जाए।

AI के लिए बिजली की भारी जरूरत

आने वाले समय में AI को चलाने के लिए बहुत ज्यादा और स्थिर बिजली की जरूरत होगी। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए UAE अपने न्यूक्लियर पावर का इस्तेमाल कर रहा है। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:

  • बिजली उत्पादन: जनवरी 2025 तक UAE की करीब 25% बिजली न्यूक्लियर पावर से बनी।
  • सर्दियों का असर: सर्दियों में यह हिस्सा बढ़कर 60% तक चला जाता है क्योंकि तब AC की मांग कम रहती है।
  • बड़ी कंपनियां: ADNOC, Emirates Steel और Emirates Global Aluminium जैसी बड़ी कंपनियां इस पावर का फायदा उठा रही हैं।

दूसरे न्यूक्लियर प्लांट की तैयारी

UAE सरकार अब एक और न्यूक्लियर प्लांट बनाने की संभावनाओं को तलाश रही है। जुलाई 2024 में IAEA के प्रतिनिधि हमद अल काबी ने कहा कि सरकार बरकाह प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए दूसरे प्लांट पर विचार कर रही है। वहीं, ENEC के CEO मोहम्मद अल हमादी ने बताया कि वे अमेरिका जैसे देशों में भी न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स के लिए सलाह और मदद देने के मौके देख रहे हैं।

ऊर्जा रणनीति और भविष्य के लक्ष्य

UAE की नेशनल एनर्जी स्ट्रेटजी के तहत 2030 तक रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान ने कहा कि बरकाह प्लांट का पूरा होना नेट-जीरो लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम था। सरकार का पूरा जोर अब ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता पर है ताकि भविष्य की तकनीक के लिए बिजली की कमी न हो।