UAE और Canada के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता, अब व्यापार के साथ बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

UAE और Canada ने अपने रिश्तों को नई मजबूती दी है। 5 अगस्त 2026 को UAE के राष्ट्रपति हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्ने के बीच हुई फोन पर बातचीत के बाद एक बड़ा ऐलान किया गया। दोनों देशों ने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर बातचीत को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो भविष्य में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
व्यापार और निवेश में आएगी तेजी
यह समझौता दोनों देशों के इतिहास में अब तक की सबसे तेजी से की गई बातचीत का नतीजा है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक संबंधों को और अधिक सशक्त बनाना है। इस साझेदारी के जरिए टैरिफ में कमी आएगी, जिससे कनाडाई श्रमिकों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और वहां की कंपनियां UAE की लगभग 700 बिलियन डॉलर की विशाल अर्थव्यवस्था में बेहतर तरीके से काम कर पाएंगी। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच गैर-तेल व्यापार 4.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, जो पिछले साल के मुकाबले 21 प्रतिशत अधिक था। वर्तमान में, UAE मध्य पूर्व में कनाडा का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है।
किन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में सालाना 10 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी देखी गई है। अब इस नए समझौते के बाद व्यापार और निवेश के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स
- बुनियादी ढांचा यानी इंफ्रास्ट्रक्चर
- टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- विकास सहायता
क्षेत्रीय शांति पर भी हुई चर्चा
व्यापारिक चर्चाओं के अलावा, राष्ट्रपति शेख मोहम्मद और प्रधानमंत्री मार्क कार्ने ने आपसी हितों से जुड़े कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार साझा किए। बातचीत का मुख्य केंद्र मध्य पूर्व की स्थिति रही, जिसमें दोनों नेताओं ने क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और शांति को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने आने वाले समय में भी लगातार संपर्क में रहने पर सहमति जताई है ताकि इस मजबूत रिश्ते को भविष्य में और बेहतर बनाया जा सके। यह खबर उन भारतीयों के लिए भी अहम है जो UAE में रहते हैं और वैश्विक व्यापार जगत पर नजर रखते हैं, क्योंकि ऐसी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां सीधे तौर पर निवेश और नौकरियों के अवसरों को प्रभावित करती हैं।