UAE के सेंट्रल बैंक (CBUAE) ने एक बहुत बड़ा काम पूरा कर लिया है। उन्होंने ‘Project Aperta’ नाम के एक इंटरनेशनल प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक खत्म किया है। इस प्रोजेक्ट का मकसद अलग-अलग देशों के बीच पैसों और बिजनेस से जुड़ी जानकारियों के लेनदेन को सुरक्षित और आसान बनाना है। इससे अब ग्लोबल लेवल पर फाइनेंशियल सर्विसेज देना पहले से कहीं ज़्यादा सरल हो जाएगा।
इस प्रोजेक्ट को Bank for International Settlements (BIS) ने लीड किया था। इसमें UAE के साथ-साथ ब्रिटेन, ब्राजील, हांगकांग और भारत जैसे देशों के फाइनेंशियल नेटवर्क को एक साथ जोड़ा गया है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी देश को अपने पुराने नियमों को बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ी, बल्कि एक नई तकनीक के ज़रिए इन सभी देशों को आपस में जोड़ दिया गया है।
इन संस्थाओं ने मिलकर किया काम
इस बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कई बड़ी संस्थाओं ने साथ मिलकर काम किया। इसमें BIS Innovation Hub Hong Kong Centre, हांगकांग मोनेटरी अथॉरिटी, ब्राजील का सेंट्रल बैंक और ब्रिटेन की फाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी शामिल थीं। इसके अलावा Global Legal Entity Identifier Foundation और International Chamber of Commerce जैसे संगठनों ने भी इसमें मदद की।
बिजनेस करने वालों को क्या फायदा होगा
इस प्रोजेक्ट के तहत दो मुख्य चीज़ों का टेस्ट किया गया जिससे आम व्यापारियों और कंपनियों को सीधा फायदा पहुँचेगा।
| सुविधा | आम आदमी और बिजनेस को फायदा |
|---|---|
| डेटा पोर्टेबिलिटी | बिजनेस की वेरिफिकेशन जल्दी होगी और कागजी कार्रवाई में समय कम लगेगा। |
| ट्रेड फाइनेंस मैनेजमेंट | कॉन्ट्रैक्ट साइन करने से लेकर पेमेंट मिलने तक का पूरा प्रोसेस डिजिटल और तेज़ होगा। |
| SMEs के लिए राहत | छोटे व्यापारियों का खर्च कम होगा और विदेशी मार्केट में एंट्री लेना आसान होगा। |
| सुरक्षा | डेटा का लेन-देन सुरक्षित रहेगा और हर देश के अपने नियम भी लागू रहेंगे। |
CBUAE के गवर्नर खालिद मोहम्मद बलामा ने बताया कि Project Aperta उनके उस विजन का हिस्सा है जिससे UAE को दुनिया के टॉप सेंट्रल बैंकों में जगह मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम ज़्यादा भरोसेमंद बनेगा और बिजनेस चलाने वाली संस्थाओं को विदेशी बाज़ारों तक पहुँचने में आसानी होगी।
इस प्रोजेक्ट की एक और खास बात यह है कि इसके लिए जो भी ब्लूप्रिंट, कोड और डेटा मॉडल तैयार किए गए हैं, उन्हें पब्लिक कर दिया गया है। अब दुनिया का कोई भी दूसरा देश इन जानकारियों का इस्तेमाल करके अपना ऐसा सिस्टम बना सकता है।