यूएई सरकार ने भारतीयों के लिए नागरिकता और रहने के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. हाल ही में कुछ भारतीय क्रिकेटरों को नागरिकता दी गई है, वहीं एक नया गोल्डन वीज़ा प्रोग्राम भी शुरू हुआ है. अब भारतीय नागरिक बिना भारी निवेश के भी यूएई में लंबे समय तक रह सकेंगे.
नया गोल्डन वीज़ा प्रोग्राम क्या है और इसके क्या फायदे हैं?
यूएई ने अब एक नामांकन-आधारित गोल्डन वीज़ा प्रोग्राम शुरू किया है, जिससे भारतीय और बांग्लादेशी नागरिकों को बड़ा फायदा होगा. इस प्रोग्राम की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- फीस: इसके लिए एकमुश्त 1 लाख दिरहम (करीब 23.3 लाख रुपये) शुल्क देना होगा.
- बदलाव: अब आजीवन निवास पाने के लिए संपत्ति खरीदने या ट्रेड लाइसेंस लेने की ज़रूरत नहीं है.
- आवेदन प्रक्रिया: आवेदक दुबई जाए बिना अपने देश में OneVASCO सेंटर के ज़रिए प्री-अप्रूवल ले सकते हैं.
- जांच: आवेदन के बाद आपराधिक रिकॉर्ड, मनी लॉन्ड्रिंग और सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच की जाएगी.
- अतिरिक्त लाभ: गोल्डन वीज़ा धारक अपने परिवार को यूएई ला सकते हैं और उन्हें 92 देशों में छूट दिलाने वाला “इसाड कार्ड” भी मिलेगा.
नागरिकता के नियम और क्रिकेटरों को मिला मौका
यूएई ने कुछ खास श्रेणियों के लोगों को अपनी नागरिकता देने का फैसला किया है. हाल ही में 22-23 अप्रैल 2026 को प्राकृतिककरण के ज़रिए पांच क्रिकेटरों को नागरिकता दी गई, जिनमें भारतीय खिलाड़ी अक्षदीप नाथ और हरप्रीत सिंह भाटिया शामिल हैं. इससे वे सीधे यूएई की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन सकेंगे.
इसके अलावा, जनवरी 2021 के कानून के तहत निवेशक, डॉक्टर, वैज्ञानिक और कलाकार अपनी मूल नागरिकता रखे हुए भी अमीराती नागरिकता पा सकते हैं. वहीं, 7 जनवरी 2026 से लागू होने वाले नए कानून के तहत कंपनियों को ‘कॉर्पोरेट नागरिकता’ का दर्जा मिलेगा, लेकिन इससे कंपनी के मालिकों को व्यक्तिगत नागरिकता नहीं मिलेगी.
भारतीयों के लिए वीज़ा ऑन अराइवल में क्या बदलाव हुए?
यूएई ने भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा ऑन अराइवल की सुविधा का दायरा बढ़ा दिया है. 13 फरवरी 2025 से, जिन भारतीयों के पास निम्नलिखित देशों का वैध निवास परमिट है, वे यूएई पहुँचने पर सीधे वीज़ा ले सकते हैं:
- ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, न्यूज़ीलैंड, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर.
- यह सुविधा उन लोगों के लिए भी जारी है जिनके पास अमेरिका, यूके या यूरोपीय संघ का वैध वीज़ा या निवास परमिट है.