यूएई में बारिश को बढ़ाने और पानी की कमी को दूर करने के लिए नेशनल सेंटर ऑफ मेटेरियोलॉजी (NCM) काफी सक्रिय है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक करीब 80 क्लाउड सीडिंग मिशन चलाए जा चुके हैं। इसका मुख्य मकसद देश में भूजल भंडार को भरना और भविष्य के लिए पानी की सुरक्षा को मजबूत करना है।

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क्लाउड सीडिंग कैसे काम करती है और क्यों की जाती है?

विशेषज्ञों ने बताया कि हर बादल से बारिश नहीं कराई जा सकती। इसके लिए केवल विशेष प्रकार के convective clouds का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से कुछ इलाकों में बारिश ज्यादा होती है और कुछ जगहों पर इसका असर कम दिखता है। NCM के अनुसार क्लाउड सीडिंग का मकसद पहले से मौजूद बारिश की संभावना को बढ़ाना है, न कि बादल न होने पर बारिश बनाना।

यूएई रिसर्च प्रोग्राम फॉर रेन एन्हांसमेंट साइंस (UAEREP) की निदेशक आलिया अल मजरूई ने कहा कि यह तकनीक जलवायु परिवर्तन का सामना करने की एक रणनीति है। इससे पारंपरिक पानी के स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, NCM के महानिदेशक अब्दुल्ला अल मंदौस ने बताया कि अब बारिश बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी उपयोग किया जा रहा है।

रिकॉर्ड बारिश का सच और आगे की योजनाएं क्या हैं?

मार्च 2026 के अंत में यूएई में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश को लेकर NCM ने एक जरूरी स्पष्टीकरण दिया। केंद्र ने बताया कि 21 से 28 मार्च के बीच हुई यह भारी बारिश पूरी तरह प्राकृतिक थी और इसका क्लाउड सीडिंग से कोई लेना-देना नहीं था। उस समय कोई मिशन नहीं चलाया गया था।

  • बजट और रिसर्च: 21 जनवरी 2026 को जल सुरक्षा और क्लाउड सीडिंग रिसर्च के लिए 1.5 मिलियन डॉलर का अनुदान जारी किया गया।
  • सुरक्षा नियम: NCM ने साफ किया कि वे पायलटों और विमानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, इसलिए बहुत खराब मौसम के दौरान सीडिंग ऑपरेशन नहीं किए जाते।
  • बड़ी इवेंट: दिसंबर 2026 में यूएई संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन की सह-मेजबानी करने वाला है।

अधिकारियों ने बताया कि मौसम के अनुसार 2026 के बाकी समय में भी ऐसे मिशन जारी रहेंगे ताकि देश की जल सुरक्षा बनी रहे।