संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरी दुनिया में तनाव बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र में यूएई के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत अबूशहाब ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें गैरकानूनी और लापरवाह बताया है। इस संकट के बाद अब सुरक्षा परिषद में बड़ी बैठक हुई है ताकि अंतरराष्ट्रीय शांति को बहाल किया जा सके।

📰: Oman Economic Plan: ओमान सरकार का बड़ा प्लान, अब तेल के भरोसे नहीं रहेगा देश, डिजिटल इकोनॉमी और नए बिजनेस पर जोर

ईरान ने UAE पर कैसे किया हमला और कितना हुआ नुकसान

जानकारी के मुताबिक 4 मई 2026 को ईरान ने यूएई पर 12 बैलिस्टिक मिसाइल, 3 क्रूज मिसाइल और 4 ड्रोन दागे थे। इस हमले की वजह से फुजैरा में एक नागरिक ऊर्जा सुविधा में आग लग गई और तीन लोग घायल हो गए। यूएई की वायु रक्षा प्रणालियों ने ज्यादातर खतरों को हवा में ही रोक लिया, जिससे जान-माल का नुकसान कम हुआ।

संयुक्त राष्ट्र में यूएई और बहरीन ने क्या कहा

राजदूत अबूशहाब ने कहा कि ईरान के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएनएससी प्रस्ताव 2817 का खुला उल्लंघन हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूएई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल जारी रखेगा। वहीं बहरीन के राजदूत जमाल फ़ारेस अलरोवैई ने भी इन हमलों को जघन्य बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होकर कार्रवाई करने की मांग की। राजदूत अबूशहाब ने यह भी बताया कि 28 फरवरी से अब तक यूएई ने 500 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों और 2,000 ड्रोन को रोका है।

खाड़ी देशों की सुरक्षा और दुनिया पर इसका क्या असर होगा

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती असुरक्षा का असर केवल खाड़ी देशों पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार, सप्लाई चेन और खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है जिससे आर्थिक स्थिरता को खतरा है। वर्तमान स्थिति काफी तनावपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी तेल टैंकर पर गोलीबारी की है। साथ ही यूएई के रक्षा मंत्रालय ने नागरिकों को अलर्ट जारी कर घर के अंदर रहने की सलाह दी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने यूएई पर कब और क्या हमला किया?

ईरान ने 4 मई 2026 को यूएई पर 12 बैलिस्टिक मिसाइल, 3 क्रूज मिसाइल और 4 ड्रोन लॉन्च किए, जिससे फुजैरा की एक ऊर्जा सुविधा में आग लग गई और 3 लोग घायल हुए।

यूएनएससी प्रस्ताव 2817 क्या है?

यह प्रस्ताव 11 मार्च 2026 को अपनाया गया था, जो खाड़ी देशों और जॉर्डन के खिलाफ ईरान के हमलों की निंदा करता है और इन्हें अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा मानता है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.