UAE ने सीरिया पर हुए इस्राइली हमलों की की कड़ी निंदा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत दखल देने की अपील.

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने सीरिया के अबू अल-धुहूर मिलिट्री एयरबेस पर हुए इस्राइली हवाई हमलों को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। UAE Ministry of Foreign Affairs (MoFA) की तरफ से यह बयान मंगलवार सुबह जारी किया गया, जिसमें इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और साल 1974 के डिसइंगेजमेंट समझौते का खुला उल्लंघन बताया गया है। सरकार ने साफ किया है कि सीरिया की संप्रभुता के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ मंजूर नहीं किया जाएगा और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत कदम उठाना होगा ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
सीरियाई मीडिया ने की पुष्टि, नहीं हुआ कोई जानी नुकसान
सीरियाई सरकारी मीडिया ने इस बात की पुष्टि की है कि इस्राइल की तरफ से कुल आठ हवाई हमले किए गए, जिनका निशाना अबू अल-धुहूर बेस का रनवे और स्टोरेज फैसिलिटी था। गनीमत यह रही कि इन हमलों में हालांकि काफी ज्यादा मटेरियल नुकसान हुआ, लेकिन किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई। साल 2014 के दिसंबर महीने में बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद से इस एयरबेस पर यह इस्राइल का पहला हमला है। यह एयरबेस साल 2013 से लगभग बंद पड़ा था और हाल ही में इसे नई सीरियाई सेना के ट्रेनिंग सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले से ठीक पहले विदेशी लड़ाकों को वहां से खाली करने की सलाह दे दी गई थी।
तुर्की, जॉर्डन और कतर ने भी जताया विरोध
इस पूरे मामले पर सीरिया के विदेश मंत्रालय ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए इसे क्षेत्रीय अखंडता पर सीधा हमला करार दिया है। इसके अलावा तुर्की के विदेश मंत्रालय ने भी सीरिया की एकता के खिलाफ उठाए गए इस कदम की आलोचना की है। वहीं जॉर्डन और कतर जैसे देशों ने भी आधिकारिक तौर पर इस निंदा में अपनी आवाज जोड़ी है। अमेरिका के सीरिया और इराक के लिए स्पेशल प्रेसिडेंटल एनवॉय Tom Barrack ने इन हमलों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद खतरनाक और गैर-जरूरी बढ़ावा देने वाला कदम बताया है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की है कि वे हथियारों की जगह बातचीत का रास्ता चुनें ताकि इलाके में शांति बनी रहे।
इस्राइल का पक्ष और सुरक्षा के दावे
दूसरी तरफ इस्राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के कार्यालय ने इन हमलों का बचाव किया है। इस्रिआई अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा के मौजूदा हालात में एक बड़े उल्लंघन के जवाब में उठाया गया था। उनका आरोप है कि सीरिया अलेप्पो के पास बने एक एयरबेस पर तुर्की की सेना को तैनात करने की तैयारी कर रहा था, जिसे इस्राइल अपनी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानता है। इस्राइल का साफ कहना है कि वह इस तरह के खतरों को बर्दाश्त नहीं करेगा और क्षेत्र में पुराने हालात ही देखना चाहता है। इस पूरी स्थिति पर मिडिल ईस्ट के देशों की पैनी नजर बनी हुई है, जिससे वहां रह रहे प्रवासियों और कामगारों के मन में भी चिंता का माहौल है।