UAE ने सीरिया की जमीन पर इजरायल के हमलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अबू धाबी ने साफ कहा है कि किसी भी देश की संप्रभुता और सुरक्षा के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी गरमा गया है और UAE ने इसे शांति के लिए खतरा बताया है।

इजरायल की घुसपैठ और गोलाबारी

इजरायल की सेना ने सीरिया के Quneitra और Daraa इलाकों में घुसपैठ की और वहां आर्टिलरी से गोलाबारी की। UAE के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने इस घटना की सबसे कड़े शब्दों में निंदा की है। मंत्रालय ने कहा कि इजरायल की ये हरकतें अंतरराष्ट्रीय कानून और 1974 के Disengagement Agreement का साफ तौर पर उल्लंघन हैं।

UAE का कड़ा स्टैंड

UAE सरकार ने सीरिया की स्थिरता और उसकी जमीन की सुरक्षा का पूरा समर्थन किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह सीरिया के लोगों की शांति, गरिमा और विकास की उम्मीदों के साथ खड़ा है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह मांग की गई है कि वे इन हमलों को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाएं ताकि क्षेत्रीय तनाव और न बढ़े।

अन्य देशों की प्रतिक्रिया और इजरायल का दावा

सिर्फ UAE ही नहीं, बल्कि Qatar, Saudi Arabia, Jordan और Turkey ने भी इजरायल के इस कदम का विरोध किया है। इन सभी देशों ने इसे सीरिया की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। दूसरी तरफ, इजरायल की सेना ने दावा किया कि उसने दक्षिणी सीरिया के सुरक्षा क्षेत्र में कुछ आतंकवादियों को खत्म किया है। स्थानीय संगठन Sijil की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में इजरायल ने करीब 300 बार नियमों का उल्लंघन किया है, जिसमें 70 घुसपैठ और 28 छापेमारी शामिल हैं।

UN की चिंता और नियम

UN Security Council ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। जून 2026 में UN ने UNDOF (UN Disengagement Observer Force) के जनादेश को 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। UN ने दोनों पक्षों से 1974 के समझौते का पूरी तरह पालन करने को कहा है। सीरिया के प्रतिनिधि ने UN में कहा कि इजरायल की ये हरकतें ही स्थिरता के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट हैं।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.