UAE की कड़ी निंदा, अफगानिस्तान के काबुल में स्कूल पर हुए बम धमाके में बच्चों को आया गंभीर नुकसान.

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक शिक्षा केंद्र पर हुए भयानक बम धमाके की कड़े शब्दों में निंदा की है। यह दर्दनाक घटना 17 अगस्त 2026 की शाम को घटी थी, जिसके बाद पूरी दुनिया में शोक और गुस्से का माहौल है। UAE के विदेश मंत्रालय ने 20 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस हमले को एक आपराधिक कृत्य बताया है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश किसी भी तरह की हिंसा और आतंकवाद के खिलाफ है जो वहां की शांति और सुरक्षा को बिगाड़ने की कोशिश करता है। इस बारे में अधिक जानकारी आप UAE Ministry of Foreign Affairs की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
इस दुखद समय में UAE सरकार ने अफगानिस्तान के आम लोगों के प्रति अपनी पूरी एकजुटता दिखाई है और घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। इस बारे में विस्तार से रिपोर्ट WAM News पर भी पब्लिश की गई है। अधिकारियों के मुताबिक जिस जगह को निशाना बनाया गया, उसका नाम Sham-e-Hedayat प्राइवेट स्कूल है जो काबुल के Dasht-e-Barchi इलाके में स्थित है। इस हमले में कई बेकसूर लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानी UNICEF की रिपोर्ट के मुताबिक इस धमाके में घायल होने वालों में 42 बच्चे शामिल हैं जिनकी उम्र 9 से 14 वर्ष के बीच बताई जा रही है।
घायल बच्चों का इलाज और अस्पतालों की स्थिति
एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल संगठन जिसका नाम Emergency है, उसने पुष्टि की है कि उसके काबुल स्थित सर्जिकल सेंटर में 35 बच्चों का इलाज किया गया। ये सभी बच्चे 10 से 14 वर्ष की उम्र के हैं जिनके शरीर पर बम के छर्रे लगने के गंभीर जख्म थे। इनमें से कम से कम 3 बच्चों की हालत इतनी गंभीर थी कि तुरंत ऑपरेशन करना पड़ा। तालिबान के अधिकारियों ने इस घटना के होने की पुष्टि कर दी है और मामले की जांच भी शुरू कर दी है। जांच के दौरान स्कूल के प्रिंसिपल, दो शिक्षकों और एक सुरक्षा गार्ड को हिरासत में लिया गया है। तालिबान के प्रवक्ता Zabihullah Mujahid ने इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट या उसके साथियों का हाथ होने की आशंका जताई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है तीखी आलोचना
इस भयानक हमले के बाद दुनिया भर के बड़े संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र, UNAMA और यूरोपीय संघ के शिष्टमंडल ने अफगानिस्तान में हुए इस कृत्य के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। अफगानिस्तान में मानवाधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैप साहब Richard Bennett ने भी इस हमले की निंदा की है। उन्होंने खासतौर पर हजारा समुदाय को निशाना बनाए जाने के मामले में एक स्वतंत्र जांच की मांग की है। इसके अलावा अफगानिस्तान फ्रीडम फ्रंट यानी AFF ने भी इस हिंसा की निंदा करते हुए तालिबान अधिकारियों पर सुरक्षा व्यवस्था में पूरी तरह फेल होने का बड़ा आरोप लगाया है।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगस्त 2021 के बाद से शिया और हजारा आबादी को निशाना बनाकर 50 से ज्यादा हमले किए जा चुके हैं। हमलों के इस लंबे सिलसिले की वजह से अब तक कुल मिलाकर एक हजार से अधिक लोग हताहत हो चुके हैं। इस तरह की घटनाओं से आम नागरिकों और वहां रहने वाले परिवारों के मन में डर का माहौल बना हुआ है, और हर कोई शांति की अपील कर रहा है।