UAE में रहने वाले लोगों के लिए एक जरूरी खबर है। UAE Cybersecurity Council ने डिजिटल पहचान की चोरी (Digital Identity Theft) को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। परिषद के मुताबिक हर तीन में से एक व्यक्ति ऐसे साइबर हमलों के खतरे में है, जिससे उनका बैंक खाता और निजी जानकारी चोरी हो सकती है।

साइबर अपराधियों के निशाने पर क्या है और कितना बढ़ा खतरा

काउंसिल ने बताया कि साइबर अपराधी अब लोगों के पर्सनल डेटा, बैंकिंग जानकारी, हेल्थ रिकॉर्ड और सोशल मीडिया अकाउंट्स को आसान निशाना बना रहे हैं। AI, IoT और क्लाउड सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने से यह खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। आंकड़ों के अनुसार, इस साल के पहले छह महीनों में डिजिटल पहचान पर होने वाले साइबर हमलों में 32% की बढ़ोतरी हुई है।

  • AI से चलने वाली फिशिंग अब 90% से ज्यादा डिजिटल उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार है।
  • लगभग 60% वित्तीय हमले चोरी हुए लॉगिन क्रेडेंशियल्स (User ID और Password) से शुरू होते हैं।
  • वैश्विक स्तर पर हर महीने करीब 1.4 बिलियन अकाउंट हैक किए जा रहे हैं।

खुद को साइबर हमले से कैसे बचाएं

विशेषज्ञों ने आम लोगों को सुरक्षित रहने के लिए कुछ आसान तरीके बताए हैं। सबसे जरूरी है कि लोग मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का इस्तेमाल करें और एक ही पासवर्ड को बार-बार अलग ऐप्स में न डालें। किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।

  • Multi-Factor Authentication (MFA) को जरूर चालू करें, क्योंकि यह 99% से ज्यादा हमलों को रोकने में मददगार है।
  • मोबाइल ऐप्स केवल आधिकारिक स्टोर से ही डाउनलोड करें और इंस्टॉल करने से पहले उसकी अनुमतियों (Permissions) को जांचें।
  • सार्वजनिक जगहों पर लगे संदिग्ध क्यूआर कोड (QR Code) को स्कैन न करें।

सरकारी नियम और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

यूएई सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। Central Bank ने अब कमजोर एसएमएस और ईमेल ओटीपी की जगह ज्यादा सुरक्षित ऐप-आधारित सत्यापन (App-based Verification) को अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा, Federal Decree-Law No. 5 of 2012 और Federal Decree-Law No. 34 of 2021 जैसे कानून पहचान की चोरी और धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान करते हैं। जनता को जागरूक करने के लिए “Cyber Pulse” अभियान भी चलाया जा रहा है, ताकि लोग डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बिना किसी डर के कर सकें।