यूएई (UAE) में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का ख़तरा तेज़ी से बढ़ रहा है। सरकार ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी नकली फोटो, वीडियो और आवाज़ के ज़रिए आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। यूएई साइबर सुरक्षा परिषद ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं।

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UAE में डीपफेक को लेकर क्या हैं सरकारी नियम और सजा?

यूएई साइबर सुरक्षा परिषद (UAE Cybersecurity Council) ने साफ़ तौर पर चेतावनी दी है कि किसी भी व्यक्ति की नकली फोटो, वीडियो या आवाज़ बनाना और उसे सोशल मीडिया पर शेयर करना एक गंभीर अपराध है।

  • फेडरल डिक्री-कानून संख्या (34) 2021: इस कानून के तहत भ्रामक डीपफेक कंटेंट बनाने, बदलने या शेयर करने वालों को जेल की सजा और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
  • दैनिक साइबर हमले: अधिकारियों के अनुसार, यूएई में हर दिन लगभग 7 लाख साइबर हमलों के प्रयास दर्ज किए जा रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए नेशनल साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर को सक्रिय किया गया है।

आम लोग कैसे बच सकते हैं इस बड़े ऑनलाइन धोखे से?

दुबई पुलिस और सरकार के अन्य विभागों ने लोगों को जागरूक करने के लिए कई गाइडलाइंस जारी की हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आजकल साइबर अपराधी AI अवतारों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो असली चेहरे और आवाज़ की हुबहू नकल कर लेते हैं। इससे बचने के लिए कुछ ख़ास बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:

  • किसी भी अनजान वीडियो कॉल या ऑडियो संदेश पर तुरंत भरोसा न करें और वित्तीय लेन-देन से पहले पहचान की पुष्टि ज़रूर करें।
  • दुबई पुलिस के अनुसार, संकट के समय ऐसी अफ़वाहें ज़्यादा फैलती हैं, इसलिए केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर ही विश्वास करें।

डीपफेक को पकड़ने के लिए कौन से नए टूल्स आ रहे हैं?

डीपफेक के बढ़ते ख़तरे से निपटने के लिए तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। शोधकर्ताओं ने ‘RealACaller’ नाम का एक मोबाइल ऐप तैयार किया है जो असली और नकली अरबी आवाज़ों में फ़र्क कर सकता है। इसके अलावा कई टेक कंपनियों ने क्रोम एक्सटेंशन और सोशल मीडिया बॉट्स भी पेश किए हैं, जो इंटरनेट पर संदिग्ध तस्वीरों और वीडियो की जांच कर सकते हैं। दुबई पुलिस भी अपनी जांच प्रणालियों को और आधुनिक बना रही है ताकि अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

UAE में डीपफेक वीडियो बनाने या शेयर करने पर क्या सजा है?

यूएई साइबर सुरक्षा कानून (फेडरल डिक्री-कानून संख्या 34) के तहत भ्रामक डीपफेक कंटेंट बनाने, एडिट करने या उसे इंटरनेट पर शेयर करने पर जेल की सजा और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

हैकर्स वीडियो कॉल के ज़रिए कैसे धोखा दे रहे हैं?

साइबर अपराधी एडवांस AI अवतारों का इस्तेमाल करके असली व्यक्ति जैसी आवाज़ और चेहरा बना लेते हैं। इससे वे वीडियो कॉल पर असली दिखने का भ्रम पैदा कर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।