ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को एक बड़ा आर्थिक झटका दिया है। UAE ने पाकिस्तान से अपने 3.5 अरब डॉलर यानी करीब 29 हजार करोड़ रुपये का कर्ज तुरंत वापस लौटाने की मांग की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही तंगहाली से जूझ रहा है और उसके पास विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी है। इस भुगतान के बाद पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और भी खराब होने की आशंका है।

UAE ने अचानक कर्ज वापसी की मांग क्यों की?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, UAE का यह कदम पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ बढ़ती नजदीकियों और रणनीतिक समझौतों से जोड़कर देखा जा रहा है। खाड़ी क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों और सुरक्षा चिंताओं के बीच UAE ने अपने पैसे वापस मांगे हैं। पाकिस्तान इस कर्ज को निवेश में बदलने के लिए UAE के साथ बातचीत कर रहा था, लेकिन फिलहाल उसे सफलता नहीं मिली है।

  • ब्याज दर में बढ़ोतरी: UAE ने पिछले साल ही कर्ज पर ब्याज दर 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दी थी।
  • पुराना कर्ज: पाकिस्तान ने 1996-97 में लिया 45 करोड़ डॉलर का कर्ज भी अब तक नहीं चुकाया है।
  • समय सीमा: जनवरी में परिपक्व होने वाले कर्ज को UAE ने केवल एक महीने के लिए ही आगे बढ़ाया था।

पाकिस्तान के खजाने पर क्या होगा इसका असर?

पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (SBP) के पास फिलहाल लगभग 16.3 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। अगर पाकिस्तान UAE को 3 अरब डॉलर से ज्यादा की राशि लौटाता है, तो उसके भंडार में सीधे तौर पर 18 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आएगी। इससे देश की विदेशों से जरूरी सामान खरीदने की क्षमता काफी कमजोर हो जाएगी। इसके अलावा, पाकिस्तान को अप्रैल महीने में ही 1.3 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड का भुगतान भी करना है, जिससे संकट और गहरा सकता है।

विवरण महत्वपूर्ण जानकारी
UAE द्वारा मांगी गई कुल राशि 3.5 अरब डॉलर
पाकिस्तान का कुल विदेशी भंडार 16.3 अरब डॉलर
भंडार में संभावित गिरावट 18 प्रतिशत
अप्रैल में देय यूरोबॉन्ड भुगतान 1.3 अरब डॉलर
वर्तमान ब्याज दर 6.5 प्रतिशत