UAE में रहने वाले प्रवासियों के लिए अपनी संपत्ति, खासकर डिजिटल अकाउंट्स और क्रिप्टो वॉलेट्स को लेकर बड़ी खबर है। अब सरकार ने डिजिटल संपत्तियों के उत्तराधिकार के लिए नए नियम बनाए हैं ताकि मौत के बाद परिवार वालों को परेशानी न हो। अगर आपने सही तरीके से वसीयत नहीं बनाई है, तो आपके वारिसों के लिए पैसा निकालना मुश्किल हो सकता है।
Dubai International Financial Centre (DIFC) ने डिजिटल संपत्ति के लिए एक खास ‘डिजिटल एसेट्स विल’ शुरू की है। इसके तहत अब डिजिटल संपत्तियों को ‘अमूर्त संपत्ति’ माना जाएगा। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए है जो अपनी डिजिटल संपत्ति का नियंत्रण अपने जीवनकाल में रखना चाहते हैं और मौत के बाद उसे अपने वारिसों को सौंपना चाहते हैं।
नए नियमों और कानूनों की जानकारी
UAE सरकार ने उत्तराधिकार कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं, जो आने वाले समय में प्रवासियों पर गहरा असर डालेंगे। खास तौर पर उन लोगों के लिए जिन्होंने वसीयत नहीं बनाई है।
| नियम/पहल | लागू होने की तारीख | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| DIFC डिजिटल एसेट्स विल | अक्टूबर 2024 | डिजिटल संपत्ति के लिए विशेष वसीयत की सुविधा |
| UAE उत्तराधिकार कानून सुधार | 1 जनवरी 2026 | प्रवासियों के लिए उत्तराधिकार के नए नियम |
| Dubai Law No. 2 | मार्च 2025 | DIFC कोर्ट्स की शक्तियों में बढ़ोतरी |
| Jabr प्लेटफॉर्म | अक्टूबर 2025 | विरासत के मामलों का निपटारा अब 3 कार्य दिवसों में |
| इन्वेंटरी और वितरण प्रोजेक्ट | अक्टूबर 2026 | संपत्ति के वितरण के लिए सरकारी संस्थाओं का समन्वय |
पासवर्ड और एक्सेस की बड़ी चुनौती
कानूनी तौर पर क्रिप्टो और डिजिटल अकाउंट्स को संपत्ति माना गया है, लेकिन असली समस्या इन्हें खोलने की है। OFZA के CEO आमिर तबच ने बताया कि अदालतें यह तो तय कर सकती हैं कि पैसा किसका है, लेकिन वे किसी के प्राइवेट पासवर्ड या सीड फ्रेज को रिसेट नहीं कर सकतीं।
इसलिए विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग अपनी वसीयत में डिजिटल संपत्तियों का साफ जिक्र करें। साथ ही, पासवर्ड और प्राइवेट कीज जैसी जरूरी जानकारी एक सुरक्षित जगह पर रखें और किसी भरोसेमंद व्यक्ति को ‘डिजिटल एग्जीक्यूटर’ नियुक्त करें जो तकनीकी रूप से सक्षम हो।
वसीयत न होने पर क्या होगा
अगर किसी व्यक्ति ने वसीयत नहीं बनाई है, तो मौत की खबर मिलने के बाद उनके नाम पर मौजूद सभी बैंक अकाउंट्स, जिनमें जॉइंट अकाउंट भी शामिल हैं, फ्रीज कर दिए जाएंगे। इसका सीधा असर परिवार पर पड़ता है क्योंकि एंड ऑफ सर्विस बेनिफिट्स भी इन्हीं फ्रीज अकाउंट्स में जाते हैं, जिन्हें प्रोबेट प्रक्रिया पूरी होने तक नहीं निकाला जा सकता।
नए नियमों के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से अगर किसी विदेशी निवासी की मौत बिना वसीयत या वारिस के होती है, तो उनकी संपत्ति को फ्रीज कर राज्य द्वारा प्रबंधित चैरिटेबल एंडोमेंट (Waqf) में ट्रांसफर किया जा सकता है।