UAE Cyber Security Council ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। 2026 की पहली छमाही में डिजिटल पहचान से जुड़े साइबर हमलों में 32% की बढ़ोतरी हुई है। साइबर अपराधी अब लोगों की निजी जानकारी, बैंक ट्रांजेक्शन और हेल्थ रिकॉर्ड्स को निशाना बना रहे हैं, जिससे यहाँ रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है।

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डिजिटल पहचान पर हमले क्यों बढ़ रहे हैं और इनका क्या असर होता है?

काउंसिल ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और क्लाउड ऐप्स के बढ़ते इस्तेमाल से डिजिटल पहचान ज्यादा असुरक्षित हो गई है। अब अपराधी AI-आधारित फिशिंग का सहारा ले रहे हैं, जिससे 90% से ज्यादा डिजिटल सेंधमारी हो रही है। इन हमलों के जरिए अपराधी लोगों की पहचान चुराकर धोखाधड़ी करते हैं या उनके डेटा को ब्लैक मार्केट में बेच देते हैं। इससे न केवल पैसों का नुकसान होता है, बल्कि व्यक्ति की पेशेवर प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुँचती है।

खुद को साइबर हमलों से बचाने के लिए क्या उपाय करें?

UAE साइबर सिक्योरिटी काउंसिल ने आम लोगों को सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं:

  • मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA): इसका इस्तेमाल करें क्योंकि यह पहचान से जुड़े 99% हमलों को रोकने में सक्षम है।
  • मजबूत पासवर्ड: आसान पासवर्ड का इस्तेमाल न करें और समय-समय पर जटिल पासवर्ड बनाएं।
  • निजी जानकारी: अपनी संवेदनशील और निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति या लिंक के साथ शेयर न करें।
  • UAE Pass सावधानी: UAE Pass डिजिटल पहचान का इस्तेमाल करते समय फर्जी मैसेज और संदिग्ध लिंक से सावधान रहें।

UAE सरकार ने सुरक्षा के लिए क्या कानून और टूल्स बनाए हैं?

सरकार ने डिजिटल सुरक्षा के लिए UAE Pass ऐप और Emirates ID जैसे टूल्स लागू किए हैं। इसके साथ ही कड़े कानून भी बनाए गए हैं। Federal Decree Law No. 34 (2021) साइबर अपराधों और अफवाहों को रोकने के लिए है, जबकि Federal Decree Law No. 30 (2024) के तहत KYC डेटा के लिए एक केंद्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इन कानूनों के तहत डेटा का गलत इस्तेमाल करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है।