संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में ईरान की तरफ से किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने के लिए देश की रक्षा प्रणाली ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। EDGE Group द्वारा बनाए गए जैमर सिस्टम ने दुश्मन के 85 प्रतिशत से ज़्यादा ड्रोन को बेकार कर दिया। हालांकि इस हमले के दौरान फुजैराह के तेल क्षेत्र में एक ड्रोन गिरने से तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए।
🚨: Bahrain में प्रतिबंधित जगहों की फोटो लेना पड़ा भारी, दो लोगों को हुई 5 साल की जेल, लगा जुर्माना।
UAE के जैमर सिस्टम की ताकत क्या है?
UAE में बनी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक इस समय देश की एयर डिफेंस रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा है। EDGE Group के इंजीनियरों ने बहुत कम नींद लेकर दिन-रात काम किया और लाइव सिस्टम्स को अपडेट किया ताकि वे दुश्मन के बदलते हथियारों का मुकाबला कर सकें। समूह के पास SKYSHIELD-N जैसे समाधान हैं जो जैमिंग और स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं जिससे दुश्मन के ड्रोन बेकार हो जाते हैं।
EDGE Group के प्रौद्योगिकी और नवाचार के अध्यक्ष डॉ. चाओकी कासमी ने बताया कि खतरा पहुंचने से पहले तैयार रहना ज़रूरी है क्योंकि दूसरी तरफ के लोग भी अपने सेंसर और काउंटरमेजर्स लगातार बदल रहे हैं।
ईरान के हमले में क्या-क्या हुआ और क्या रहा असर?
रिपोर्ट के अनुसार 4 और 5 मई 2026 को ईरान ने UAE पर हमला किया था। इस हमले का विवरण नीचे दिया गया है:
- बैलिस्टिक मिसाइलें: 12 मिसाइलें दागी गईं।
- क्रूज मिसाइलें: 3 मिसाइलें दागी गईं।
- ड्रोन: 4 ड्रोन हमले में शामिल थे।
UAE की हवाई रक्षा प्रणाली ने ज़्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोक दिया। लेकिन एक ड्रोन फुजैराह के तेल उद्योग क्षेत्र में गिरा जिससे वहां आग लग गई। इस हादसे में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। यूएई के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा बताया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
UAE के जैमर सिस्टम ने कितने प्रतिशत ड्रोन को रोका?
EDGE Group द्वारा विकसित जैमर सिस्टम्स ने ईरान के 85 प्रतिशत से ज़्यादा दुश्मन ड्रोन को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया।
ईरान के ड्रोन हमले से भारतीयों पर क्या असर पड़ा?
फुजैराह के तेल उद्योग क्षेत्र में एक ड्रोन गिरने से आग लग गई थी जिसमें तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए।