UAE सरकार ने बिजनेस करने के तरीकों में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब देश में ई-इनवॉइसिंग सिस्टम लागू होगा, जिससे बिलिंग का पूरा तरीका डिजिटल हो जाएगा। सबसे पहले उन बड़ी कंपनियों को इस नए नियम का पालन करना होगा जिनकी सालाना कमाई 50 मिलियन दिरहम से ज़्यादा है।

नया ई-इनवॉइसिंग नियम कब से लागू होगा और किसे मानना होगा?

Ministry of Finance और Federal Tax Authority ने इस सिस्टम को चरणों में लागू करने की योजना बनाई है। सबसे पहले पायलट फेज शुरू होगा, जिसके बाद बड़ी कंपनियों और फिर अन्य सभी VAT रजिस्टर्ड बिजनेस को इसमें शामिल किया जाएगा।

समूह तारीख/डेडलाइन ज़रूरी कार्रवाई
पायलट फेज 1 जुलाई 2026 चुनिंदा बिजनेस और वॉलंटरी एडॉप्शन शुरू
बड़ी कंपनियां (50 मिलियन+ राजस्व) 31 जुलाई 2026 Accredited Service Provider (ASP) नियुक्त करना होगा
बड़ी कंपनियां (अनिवार्य लागू) 1 जनवरी 2027 ई-इनवॉइसिंग सिस्टम लाइव होगा
सभी VAT रजिस्टर्ड बिजनेस 1 जुलाई 2027 सिस्टम अनिवार्य रूप से लागू होगा
सरकारी संस्थाएं (ASP) 31 मार्च 2027 ASP नियुक्त करना होगा
सरकारी संस्थाएं (लाइव) 1 अक्टूबर 2027 सिस्टम लागू होगा

बिल बनाने के नए नियम क्या हैं और क्या बदलाव आएंगे?

अब बिजनेस को पुराने तरीके के कागज़ी बिल या PDF का इस्तेमाल नहीं करना होगा, क्योंकि इन्हें टैक्स के लिए मान्य नहीं माना जाएगा। नया सिस्टम पूरी तरह डिजिटल होगा और इसके लिए XML फॉर्मेट का इस्तेमाल करना होगा।

  • यह नियम B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) और B2G (बिजनेस-टू-गवर्नमेंट) लेन-देन पर लागू होगा।
  • फ्री ज़ोन की कंपनियां भी इस नियम के दायरे में आएंगी, जब तक कि उन्हें विशेष छूट न मिले।
  • B2C (बिजनेस-टू-कस्टमर) लेन-देन को फिलहाल इस नियम से बाहर रखा गया है।
  • बिल भेजने के लिए Peppol नेटवर्क का इस्तेमाल होगा और इसके लिए एक मान्यता प्राप्त सर्विस प्रोवाइडर (ASP) की मदद लेनी होगी।
  • गैर-VAT रजिस्टर्ड बिजनेस को लेन-देन के 14 दिनों के भीतर ई-इनवॉइस भेजना होगा।

सरकार ने इसके लिए Ministerial Decision No. 243 और 244 of 2025 जारी किए हैं। नियम न मानने वाली कंपनियों पर Cabinet Resolution No. 106 of 2025 के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या सामान्य ग्राहकों को दिए जाने वाले बिलों पर यह नियम लागू होगा?

नहीं, B2C यानी बिजनेस-टू-कस्टमर लेन-देन को फिलहाल इस ई-इनवॉइसिंग मैंडेट से बाहर रखा गया है।

क्या PDF बिल अब मान्य होंगे?

नहीं, अब पारंपरिक कागज़ी बिल या PDF मान्य नहीं होंगे। सभी इनवॉइस XML फॉर्मेट में होने चाहिए और Peppol नेटवर्क के जरिए भेजे जाने चाहिए।