UAE सरकार ने बिजनेस करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव किया है। आज 1 जुलाई 2026 से देश में ई-इनवॉइसिंग (e-invoicing) का स्वैच्छिक पायलट फेज शुरू हो गया है। इसका मतलब है कि अब कंपनियां अपनी मर्जी से डिजिटल बिलिंग सिस्टम को अपनाकर उसकी टेस्टिंग कर सकती हैं। आने वाले समय में यह व्यवस्था सभी के लिए अनिवार्य कर दी जाएगी, जिससे पुराने तरीके के पेपर और PDF बिल खत्म हो जाएंगे।

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क्या है नया ई-इनवॉइसिंग नियम

अब तक बिजनेस में बिल बनाने के लिए कागज या PDF का इस्तेमाल होता था, लेकिन नए नियम के मुताबिक अब मशीन द्वारा पढ़े जाने वाले XML या JSON फॉर्मेट में बिल बनाने होंगे। इसके लिए Peppol नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाएगा। यह सिस्टम बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) और बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (B2G) लेनदेन को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए लाया गया है।

किसके लिए कब से होगा अनिवार्य

सरकार ने अलग-अलग तरह के बिजनेस के लिए समय सीमा तय की है। बड़ी कंपनियों को सबसे पहले इस सिस्टम को अपनाना होगा।

बिजनेस का प्रकार अनिवार्य तारीख ASP नियुक्त करने की आखिरी तारीख
बड़ी कंपनियां (सालाना कमाई 5 करोड़ AED या ज्यादा) 1 जनवरी 2027 30 अक्टूबर 2026
अन्य बिजनेस (सालाना कमाई 5 करोड़ AED से कम) 1 जुलाई 2027 31 मार्च 2027
सरकारी संस्थाएं 1 अक्टूबर 2027 31 मार्च 2027

नियम न मानने पर लगेगा जुर्माना

मंत्रालय और कैबिनेट के फैसलों के मुताबिक, जो कंपनियां समय पर इस सिस्टम को नहीं अपनाएंगी या Accredited Service Provider (ASP) नियुक्त नहीं करेंगी, उन पर भारी जुर्माना लगेगा।

  • सिस्टम लागू न करने या ASP नियुक्त न करने पर 5,000 AED प्रति महीना जुर्माना।
  • गलत फॉर्मेट में बिल भेजने पर प्रति बिल 100 AED जुर्माना (अधिकतम 5,000 AED प्रति महीना)।
  • सिस्टम खराब होने की जानकारी दो कार्य दिवसों में न देने पर 1,000 AED प्रतिदिन जुर्माना।
  • बार-बार गलती करने पर जुर्माना 20,000 AED तक जा सकता है।

जरूरी बातें और रिकॉर्ड रखना

सभी बिजनेस को अब अपने अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर और ERP सिस्टम को अपडेट करना होगा ताकि वे नए डिजिटल फॉर्मेट में बिल बना सकें। साथ ही, ई-इनवॉइस और उससे जुड़े डेटा को सुरक्षित रखना जरूरी है। सामान्य डेटा को 7 साल तक और रियल एस्टेट से जुड़े डेटा को 15 साल तक इलेक्ट्रॉनिक तरीके से स्टोर करना होगा।

बिजनेस के लिए सलाह

जो लोग UAE में बिजनेस कर रहे हैं, उन्हें चाहिए कि वे अपनी कंपनी की कमाई के हिसाब से डेडलाइन देख लें और जल्द से जल्द एक मान्यता प्राप्त सर्विस प्रोवाइडर (ASP) चुन लें। पायलट फेज का फायदा उठाते हुए कंपनियां अभी से अपने सिस्टम की टेस्टिंग कर सकती हैं ताकि बाद में किसी कानूनी परेशानी या जुर्माने का सामना न करना पड़े।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com