अबू धाबी पर्यावरण एजेंसी (EAD) और अबू धाबी नेशनल एनर्जी कंपनी (TAQA) ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। दोनों संस्थाओं के बीच अबू धाबी मैंग्रोव इनिशिएटिव (ADMI) के तहत दो साल का समझौता किया गया है। इस साझेदारी के जरिए मैंग्रोव जंगलों और वहां पाए जाने वाले जीव-जंतुओं की निगरानी के लिए नई तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। यह कदम यूएई के पर्यावरण विज़न को नई दिशा देने वाला है।

समझौते की मुख्य बातें और MANTA तकनीक

इस दो साल के महत्वपूर्ण समझौते के तहत TAQA दो प्रमुख पर्यावरणीय पहलों का मुख्य और विशेष प्रायोजक बना है। इसमें ‘मैंग्रोव बायोडायवर्सिटी ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग प्रोग्राम’ की शुरुआत की जा रही है जो अपनी तरह का एकदम नया शोध है। इसके साथ ही MANTA (Mangrove Nature Tracking Assistant) तकनीक विकसित की जाएगी। अरब की खाड़ी में यह पहला ऐसा ट्रैकिंग सिस्टम है जो AI और उन्नत इकोलॉजिकल मॉनिटरिंग के जरिए काम करेगा। इसके माध्यम से मछलियों और केकड़ों जैसी प्रजातियों का अध्ययन किया जाएगा, जिससे यह पता चलेगा कि मैंग्रोव का इकोसिस्टम कितना स्थिर और सुरक्षित है।

आम लोगों की भागीदारी और यूएई का लक्ष्य

इस प्रोजेक्ट की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। कम्युनिटी-ड्रिवन साइंस के तहत आम नागरिक भी डेटा इकट्ठा करने में मदद कर सकते हैं। EAD की मरीन बायोडायवर्सिटी डिवीज़न की निदेशक मैथा मोहम्मद अल हामेली ने बताया कि यह रियल-टाइम डेटा जुटाने और ग्लोबल स्तर पर जानकारी साझा करने का एक बेहतरीन मौका है। साल 1980 के दशक से अब तक अबू धाबी में मैंग्रोव के जंगल 92 प्रतिशत बढ़ चुके हैं, जो अभी 176 वर्ग किलोमीटर में फैले हैं। यूएई ने 2030 तक 10 करोड़ नए मैंग्रोव पौधे लगाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है, और यह समझौता उसी राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.