संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अर्थव्यवस्था पर पिछले एक महीने से चल रहे क्षेत्रीय तनाव का गहरा असर दिखने लगा है। मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते से कई कंपनियों ने छंटनी और सैलरी में कटौती जैसे कड़े कदम उठाए हैं। जानकारों का कहना है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस तनाव के कारण बाजार में लोगों की खरीदारी कम हुई है और पर्यटन जैसे मुख्य क्षेत्रों पर दबाव बढ़ गया है। इससे वहां काम कर रहे लाखों भारतीयों की आर्थिक स्थिति और भारत भेजे जाने वाले पैसे पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

किन सेक्टर्स में कितनी आई है गिरावट और क्या हैं आंकड़े?

UAE के बाजार में खपत और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों में भारी कमी दर्ज की गई है। Biz2X के सीईओ Rohit Arora के मुताबिक, कुल खपत में 25-30% की गिरावट आई है। पर्यटन और होटलों के कारोबार में तो 60% तक की कमी देखी गई है। कंपनियों ने खर्च बचाने के लिए कर्मचारियों को सालाना छुट्टी पर भेजना या घर लौटने के लिए टिकट देना शुरू कर दिया है ताकि भविष्य में नौकरियों को बचाया जा सके।

सेक्टर या कैटेगरी गिरावट का प्रतिशत
पर्यटन और होटल्स 60% तक
सैलरी में कटौती 20% से 50%
इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़े 35% से 38%
कुल खपत (Consumption) 25% से 30%

भारतीय प्रवासियों और रेमिटेंस पर इसका क्या प्रभाव होगा?

भारत के लिए UAE कमाई का एक बहुत बड़ा स्रोत है। साल 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, भारत को मिलने वाले कुल विदेशी पैसे में UAE का हिस्सा 19.2% है। अब नौकरियों में असुरक्षा और सैलरी कट के चलते भारत आने वाले इस फंड में 10% से 20% की कमी आने की आशंका जताई जा रही है। आर्थिक जानकारों के अनुसार, रियल एस्टेट और बिजनेस सेटअप जैसे सेक्टर भी फिलहाल सुस्त पड़े हैं, जिससे नए निवेश पर भी ब्रेक लग गया है।

Fikrah HR की मैनेजिंग डायरेक्टर Sarah Brooks के अनुसार, छंटनी और वेतन में कटौती हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और फूड इंडस्ट्री में साफ तौर पर देखी जा रही है। Virtual Key की फाउंडर Amruta Heblikar ने बताया कि लगभग 60% असर होटल और इवेंट्स से जुड़े बिजनेस पर है। यह स्थिति उन प्रवासियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है जो हर महीने अपने घर पैसे भेजते हैं।