UAE में रहने वाले लोगों के लिए Emirates ID सिर्फ एक पहचान पत्र नहीं है, बल्कि यह उनकी सुरक्षा से जुड़ा ज़रूरी दस्तावेज़ है। हालिया रिपोर्ट और सरकारी चेतावनियों में कहा गया है कि आईडी की जानकारी दूसरों के साथ साझा करना खतरनाक हो सकता है। ऐसा करने से आप पहचान चोरी और बड़े वित्तीय फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं।

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आईडी शेयर करने से होने वाले खतरे

  • SIM Swap फ्रॉड: अपराधी आपकी आईडी और UAE Pass की जानकारी का इस्तेमाल कर आपका फोन नंबर अपने कंट्रोल में ले सकते हैं। इसके बाद वे आपके बैंक अकाउंट तक पहुँच कर पैसे निकाल सकते हैं।
  • पहचान की चोरी: आपकी आईडी की फोटो या कॉपी का इस्तेमाल कर अपराधी आपके नाम पर क्रेडिट कार्ड बनवा सकते हैं और खरीदारी कर सकते हैं, जिससे सारा कर्ज़ आपके नाम पर आ जाएगा।
  • फर्जी कॉल और मैसेज: कुछ ठग खुद को “Dubai Crisis Management” या मिनिस्ट्री ऑफ इंटीरियर का कर्मचारी बताकर फोन करते हैं और आपसे निजी जानकारी या UAE Pass का लॉगिन मांगते हैं।
  • फिशिंग मैसेज: ICP या GDRFA के नाम से फर्जी SMS भेजकर लोगों को ठगने की कोशिश की जाती है ताकि उनकी वित्तीय जानकारी चुराई जा सके।

सुरक्षा के लिए सरकार के नियम

पहचान चोरी रोकने के लिए UAE सरकार ने कई पुख्ता इंतज़ाम किए हैं। Emirates ID में थ्री-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सिस्टम है, जिसमें फिजिकल कार्ड, पिन (PIN) और फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल होता है।

  • पिन प्रोटेक्शन: कार्ड मिलने के बाद अपना पिन एक्टिवेट करें और इसे समय-समय पर बदलते रहें। गलत पिन तीन बार डालने पर कार्ड बंद हो जाता है।
  • बायोमेट्रिक डेटा: कार्ड में फिंगरप्रिंट और चेहरे की पहचान जैसी तकनीक मौजूद है ताकि सही व्यक्ति की पहचान हो सके।
  • आईडी रखने पर रोक: ICP के नियमों के मुताबिक, कोई भी कंपनी या व्यक्ति आपकी आईडी अपने पास ज़ब्त करके नहीं रख सकता। वे सिर्फ उसकी जानकारी नोट कर सकते हैं।

सावधान रहने के तरीके

Dubai Police और UAE मिनिस्ट्री ऑफ इंटीरियर ने साफ कहा है कि सरकारी अधिकारी कभी भी फोन या मैसेज पर आपका पासवर्ड, पिन या वेरिफिकेशन कोड नहीं मांगते। अगर ऐसा कोई संदिग्ध कॉल आए, तो उसे तुरंत काट दें और 901 नंबर या eCrime प्लेटफॉर्म पर शिकायत करें।

डेटा की सुरक्षा के लिए UAE ने ‘पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन लॉ’ (PDPL) लागू किया है, जो लोगों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है। साथ ही, अप्रैल 2025 तक नए बायोमेट्रिक सिस्टम आने की उम्मीद है, जिससे सरकारी और बैंकिंग सेवाओं के लिए शायद फिजिकल आईडी कार्ड दिखाने की ज़रूरत ही न पड़े।