UAE ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है जिससे पूरी दुनिया के तेल बाजार में हलचल मच गई है। 28 अप्रैल 2026 को UAE ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया कि वह OPEC और OPEC+ संगठन से बाहर निकल रहा है। यह फैसला 1 मई 2026 से लागू होगा। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में नई चर्चा शुरू हो गई है।

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UAE ने OPEC छोड़ने का फैसला क्यों लिया

UAE के ऊर्जा मंत्री Suhail al-Mazrouei ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कदम UAE के लंबे समय के आर्थिक विजन और बदलती ऊर्जा जरूरतों का हिस्सा है। UAE अब अपने घरेलू तेल उत्पादन में निवेश को और तेज करना चाहता है। सरकार चाहती है कि तेल उत्पादन की मात्रा तय करने का पूरा अधिकार उसके पास रहे और उसे किसी बाहरी संगठन के कोटे या नियमों के हिसाब से काम न करना पड़े। इसके साथ ही, ईरान के साथ चल रहे तनाव और Strait of Hormuz की स्थिति ने भी UAE को यह फैसला लेने पर मजबूर किया ताकि वह अपनी तेल सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज कर सके।

दुनिया और तेल बाजार पर इसका क्या असर होगा

UAE ओपेक के तीसरे सबसे बड़े उत्पादक देश के तौर पर जाना जाता है। अब संगठन से अलग होने के बाद UAE अपने तेल उत्पादन को बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक ले जाने की योजना बना रहा है। इस कदम से OPEC की वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित करने की ताकत कमजोर होगी। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि वह पहले भी OPEC पर तेल की कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं। बता दें कि UAE से पहले कतर ने 2019 में और अंगोला ने 2024 में अपने राष्ट्रीय हितों के कारण इस संगठन को छोड़ा था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

UAE आधिकारिक तौर पर OPEC से कब अलग होगा

UAE ने 28 अप्रैल 2026 को इसकी घोषणा की थी और यह फैसला 1 मई 2026 से प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा।

इस फैसले के बाद UAE का तेल उत्पादन लक्ष्य क्या है

OPEC के कोटे से बाहर निकलने के बाद UAE अब अपने तेल उत्पादन को बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन तक ले जाने का लक्ष्य रख रहा है।