International Maritime Organization (IMO) में ईरान के खिलाफ माहौल बनाने की UAE की कोशिशें सफल नहीं रहीं। IRNA न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE ईरान की समुद्री हरकतों के खिलाफ दुनिया का समर्थन जुटाना चाहता था, लेकिन उसे अपेक्षित कामयाबी नहीं मिली। यह विवाद मुख्य रूप से Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों को लेकर है।
IMO मीटिंग में ईरान और UAE के बीच क्या बहस हुई?
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब UAE ने IMO की लीगल कमेटी में एक पेपर पेश किया। UAE ने आरोप लगाया कि ईरान ने Strait of Hormuz में समुद्री माइन्स का इस्तेमाल किया और जहाजों के लिए टोल सिस्टम बनाया, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।
- ईरान का जवाब: ईरान के प्रतिनिधि Pouria Kolivand ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि UAE की बातें बिना किसी कानूनी आधार के हैं।
- ईरान का तर्क: ईरान ने कहा कि इस स्थिति के पीछे अमेरिका और इजरायल की आक्रामक नीतियां जिम्मेदार हैं।
- कानूनी विवाद: ईरान ने साफ किया कि वह UNCLOS का हिस्सा नहीं है और उसके ट्रांजिट पैसेज नियमों को नहीं मानता।
UAE और ईरान के बीच तनाव के मुख्य बिंदु क्या रहे?
समुद्री विवाद के अलावा दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक स्तर पर भी आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे। मई 2026 के दौरान कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए।
- पर्यावरण चिंता: 1 मई 2026 को IMO की कमेटी ने ईरान से जहाजों और पोर्ट्स पर हमले रोकने को कहा, जिसका UAE ने स्वागत किया।
- ड्रोन हमले: 6 मई 2026 को IRGC ने UAE पर किसी भी ड्रोन या मिसाइल हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया।
- BRICS मीटिंग: 16 मई 2026 को UAE के मंत्री Khalifa Shaheen Al Marar ने ईरान के आरोपों को खारिज किया और UN Security Council के Resolution 2817 का हवाला दिया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
IMO में UAE और ईरान के बीच किस बात पर विवाद हुआ?
UAE ने आरोप लगाया कि ईरान Strait of Hormuz में समुद्री माइन्स का इस्तेमाल कर रहा है और टोल सिस्टम चला रहा है, जबकि ईरान ने इन दावों को आधारहीन बताया।
ईरान ने अपनी समुद्री कार्रवाई का क्या कारण बताया?
ईरान ने कहा कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा (self-defence) के लिए थी और उसने अमेरिका व इजरायल की आक्रामक नीतियों को क्षेत्रीय तनाव का असली कारण बताया।
