एक मां के लिए इससे ज्यादा दुखद कुछ नहीं हो सकता जब उसका बच्चा बीमार हो और सिर्फ कागजी कार्रवाई या दस्तावेजों की कमी की वजह से उसे समय पर इलाज न मिल पाए। UAE में एक फोस्टर मदर ने ऐसी ही मुश्किलों का सामना किया जिससे अन्य लोगों का ध्यान इस समस्या की ओर गया। अब UAE सरकार ने इस परेशानी को दूर करने के लिए एक नया कानून लागू किया है जिससे बच्चों और उनके देखभाल करने वालों को बड़ी राहत मिली है।
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दस्तावेजों की समस्या और नया कानूनी समाधान
UAE सरकार ने Federal Decree-Law No. 12 of 2025 लागू किया है। यह कानून बच्चों के कल्याण के लिए लाया गया है। पहले कई फोस्टर बच्चों के पास अपनी पहचान के कागज नहीं होते थे जिसकी वजह से उन्हें अस्पताल में इलाज कराने या स्कूल में दाखिला लेने में परेशानी होती थी।
नए कानून के तहत अब फोस्टर बच्चों को कानूनी पहचान दी जाएगी। उन्हें Emirates ID और birth certificate जैसे जरूरी दस्तावेज दिए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर बच्चे को बिना किसी रुकावट के स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और यात्रा की सुविधा मिल सके।
अब कौन कर सकता है बच्चों की देखभाल
इस नए कानून ने फोस्टर केयर के लिए योग्यता के नियमों को काफी आसान बना दिया है। अब यह सुविधा सिर्फ अमीराती मुस्लिम जोड़ों तक सीमित नहीं है।
- गैर-अमीराती जोड़े: अब विदेशी शादीशुदा जोड़े भी बच्चों की देखभाल कर सकते हैं बशर्ते दोनों की उम्र कम से कम 25 साल हो।
- सिंगल महिलाएं: 30 साल या उससे अधिक उम्र की सिंगल महिलाएं भी अब बच्चों को फोस्टर केयर में रख सकती हैं।
- कोई पाबंदी नहीं: अब धर्म या राष्ट्रीयता के आधार पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।
काफला सिस्टम और पालन-पोषण की शर्तें
UAE में गोद लेने की प्रक्रिया पारंपरिक एडॉप्शन के बजाय Kafala सिस्टम पर चलती है। इसका मतलब यह है कि बच्चे की मूल पहचान, उसका वंश और पारिवारिक नाम नहीं बदला जाएगा। बच्चे को अपने जैविक माता-पिता का नाम और पहचान मिलती रहेगी।
फोस्टर पेरेंट्स के लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम होना होगा और शारीरिक व मानसिक रूप से फिट होना जरूरी है। साथ ही उनके खिलाफ भरोसे या सम्मान से जुड़े किसी अपराध का रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।
सरकारी निगरानी और जिम्मेदारी
इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी Ministry of Community Development (MCD) और स्थानीय अधिकारियों के पास है। दुबई में Foster Care Committee आवेदन की जांच करती है और यह देखती है कि बच्चे को सही माहौल मिल रहा है या नहीं। सरकार समय-समय पर इस बात की निगरानी करेगी कि बच्चे की देखभाल सही ढंग से हो रही है। अगर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो बच्चे को वहां से हटाया भी जा सकता है।
