UAE ने हाल ही में Gulf Cooperation Council (GCC) की 125वीं फाइनेंशियल और इकोनॉमिक कोऑपरेशन कमेटी की मीटिंग में हिस्सा लिया। इस मीटिंग का मकसद खाड़ी देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को और मज़बूत करना और व्यापार के नियमों को बेहतर बनाना था। UAE की तरफ से इस मीटिंग का नेतृत्व मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर फाइनेंशियल अफेयर्स Mohamed bin Hadi Al Hussaini ने किया।

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मीटिंग में लिए गए मुख्य फैसले और नियम

इस मीटिंग में व्यापार और कस्टम ड्यूटी से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। इसमें खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में होने वाली गलत प्रथाओं को रोकने और स्थानीय उद्योगों को बचाने पर जोर दिया गया। मीटिंग की पूरी जानकारी नीचे दी गई टेबल में है।

विषय लिया गया फैसला/अपडेट
एक्शन प्लान GCC कॉमन मार्केट कमेटी का 2026-2028 का एक्शन प्लान मंजूर हुआ
कस्टम ड्यूटी रीइनफोर्सिंग स्टील और स्टील कॉइल्स पर बढ़ी हुई ड्यूटी को आगे बढ़ाया गया
व्यापार प्रथाएं अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हानिकारक प्रथाओं को रोकने के उपाय लागू किए गए
कस्टम यूनियन GCC कस्टम यूनियन और कॉमन मार्केट की प्रगति की समीक्षा की गई
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अंतरराष्ट्रीय ग्रुप्स के साथ फ्री ट्रेड बातचीत पर अपडेट लिए गए
राष्ट्रीय उद्योग रणनीतिक राष्ट्रीय उद्योगों को बचाने के लिए नए फ्रेमवर्क पर चर्चा हुई
ट्रेड प्रैक्टिस कस्टम ड्यूटी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को मंजूरी दी गई

UAE और GCC देशों का भविष्य का लक्ष्य क्या है

UAE के मिनिस्टर Mohamed bin Hadi Al Hussaini ने बताया कि यह मीटिंग खाड़ी देशों की आर्थिक एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को बताती है। उन्होंने कहा कि उनका विजन Gulf के नागरिकों की उम्मीदों को पूरा करना और एक ऐसा वित्तीय सिस्टम बनाना है जो दुनिया में होने वाले बदलावों के हिसाब से ढल सके।

UAE मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस ने साफ किया कि वह GCC कॉमन मार्केट में अपनी भूमिका को और मज़बूत करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे क्षेत्र में टिकाऊ विकास और आर्थिक समृद्धि लाना है। इस वर्चुअल मीटिंग की अध्यक्षता बहरीन के फाइनेंस मिनिस्टर Sheikh Salman Al Khalifa ने की थी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

GCC की 125वीं मीटिंग में स्टील पर क्या फैसला लिया गया

मीटिंग में रीइनफोर्सिंग स्टील और स्टील कॉइल्स पर बढ़ी हुई कस्टम ड्यूटी को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई है।

इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य क्या था

इसका मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की गलत प्रथाओं को रोकना था।