UAE में गोल्डन वीजा धारक एक व्यक्ति को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अदालत ने उनके 1,00,000 दिरहम के मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया। यह मामला एम्प्लॉयर और कर्मचारी के बीच विवाद का था, जिसमें अदालत ने एम्प्लॉयर के खिलाफ मुआवजे की मांग को स्वीकार नहीं किया। कानूनी जानकारों के अनुसार, इस तरह के मामले यूएई की श्रम अदालतों में चल रही जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को उजागर करते हैं।

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गोल्डन वीजा और श्रम नियमों की जानकारी

गोल्डन वीजा धारकों के लिए यूएई में नियम थोड़े अलग हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास गोल्डन वीजा है, तो नौकरी छूटने या इस्तीफा देने के बाद भी उनका रेजिडेंसी स्टेटस बना रहता है। हालांकि, कानूनी रूप से नौकरी करने के लिए अभी भी MoHRE यानी मानव संसाधन और अमीरात मंत्रालय से वर्क परमिट लेना अनिवार्य है। इसके अलावा, अप्रैल 2026 के नए नियमों के तहत, गोल्डन वीजा पाने के लिए पेशेवर व्यक्ति की मासिक सैलरी कम से कम 30,000 दिरहम होनी चाहिए और उन्हें ऑक्यूपेशनल लेवल 1 या 2 में होना जरूरी है।

अदालत में चल रहे श्रम विवाद

यूएई की अदालतों में साल 2025 और 2026 के दौरान कई ऐसे मामले देखे गए हैं, जहां जज ने साक्ष्यों की बारीकी से जांच की है। जैसे जनवरी 2026 में, अबू धाबी की अदालत ने एक कंपनी को अपने पूर्व कर्मचारी को ग्रेच्युटी और नोटिस पे के तौर पर 4,27,337 दिरहम देने का आदेश दिया था। वहीं दूसरी तरफ, अक्टूबर 2025 में 1 लाख दिरहम के एक दावे को अदालत ने सबूतों की कमी के कारण खारिज कर दिया था। इन फैसलों से साफ होता है कि अदालतें किसी भी मुआवजे का फैसला देने से पहले कॉन्ट्रैक्ट और सबूतों की गहराई से जांच करती हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.