UAE और ईरान के बीच बड़े वित्तीय लेनदेन की खबर सामने आई, दो टन सोना और अरबों डॉलर ट्रांसफर होने की चर्चा.

Nura Basta16 August 20262 min read114 viewsUAE
UAE और ईरान के बीच बड़े वित्तीय लेनदेन की खबर सामने आई, दो टन सोना और अरबों डॉलर ट्रांसफर होने की चर्चा.

मध्य अगस्त 2026 में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने ईरान को लगभग दो टन सोना ट्रांसफर किया है। इस सोने की कुल कीमत 200 मिलियन डॉलर से 283 मिलियन डॉलर के बीच बताई जा रही है। इसके साथ ही अरबों डॉलर के फ्रोजन एसेट्स भी ईरान को भेजे जाने की चर्चा तेज हो गई है। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर आम लोगों और जानकारों के बीच कई तरह की बातें हो रही हैं कि आखिर इस समय ऐसा कदम क्यों उठाया गया है।

फ्लाइट्स के जरिए हुआ सामान और विमानों का ट्रांसफर

सामने आई जानकारी के मुताबिक यह सारा लेनदेन 11 अगस्त और 12 अगस्त के बीच हुआ। इस दौरान अबू धाबी से तेहरान के मेहराबाद और करज के पयाम एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट्स का संचालन किया गया। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इसके लिए UAE Royal Jet Boeing 737-7KK विमान का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि 15 पैसेंजर एयरक्राफ्ट की बिक्री और ट्रांसफर का काम भी ईरानी एयरलाइंस को किया गया है। इस काम में यूएई की कुछ कंपनियां जैसे ECT Aviation Support, AeroVision FZ और Skysource FZ शामिल थीं और आने वाले समय में कुछ और विमानों का ट्रांसफर भी हो सकता है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

अधिकारियों की चुप्पी और विश्लेषकों की राय

इससे पहले जून 2026 में 3 बिलियन डॉलर के ट्रांसफर की बात सामने आई थी, जिसे UAE Ministry of Foreign Affairs ने पूरी तरह खारिज कर दिया था और इसे बेबुनियाद बताया था। लेकिन इस बार ताजा मामलों पर आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है, जिसके कारण बाजार और राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। जानकारों का ऐसा मानना है कि अबू धाबी की तरफ से यह वित्तीय कदम तनाव को कम करने और अमेरिका तथा ईरान के बीच चल रही तनातनी के माहौल में संभावित ईरानी दुश्मनी से सुरक्षा पाने के लिए उठाया गया एक प्रयास हो सकता है।

तटस्थता बनाए रखने की कोशिश

यूएई लगातार यह कोशिश कर रहा है कि वह क्षेत्रीय मामलों में पूरी तरह तटस्थ रहे और कूटनीतिक बातचीत के जरिए अपने संबंधों को संभाले रखे। इसका मुख्य मकसद यह है कि देश दुनिया के एक बड़े और स्थिर व्यापारिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाए रखे। इसके साथ ही देश अपने बुनियादी ढांचे और तेल ले जाने वाले टैंकर्स को क्षेत्रीय संघर्षों के खतरों और नुकसान से बचाने के लिए भी लगातार काम कर रहा है ताकि देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर इसका कोई बुरा असर ना पड़े।

Share:

Comments

Leave a comment