UAE के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और विदेश मंत्री Sheikh Abdullah bin Zayed Al Nahyan ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर बात की। यह बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MOU) के बाद हुई है। Sheikh Abdullah ने कहा कि इलाके में शांति के लिए इस समझौते का पूरी तरह पालन होना बहुत जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही विवादों को सुलझाने का सही तरीका है।

US और Iran के बीच क्या हुआ समझौता

अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून 2026 को एक अंतरिम समझौता (MOU) साइन हुआ था। इस समझौते को करवाने में Pakistan ने मुख्य भूमिका निभाई और Qatar, Saudi Arabia, Turkey और Egypt ने भी मदद की। इस समझौते की मुख्य बातें ये हैं:

  • सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से बंद होंगे, जिसमें Lebanon भी शामिल है।
  • दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।
  • अमेरिका ईरान की आर्थिक पाबंदियों में ढील देगा और जमी हुई संपत्ति वापस करने में मदद करेगा।
  • ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने की आजादी देगा।
  • ईरान में आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का एक फंड बनाया जाएगा।
  • Israel को दक्षिण Lebanon के कब्जे वाले इलाकों से हटना होगा।
  • UN के परमाणु निरीक्षकों को वापस ईरान आने की अनुमति मिलेगी।

Strait of Hormuz को लेकर विवाद

इस समझौते के बावजूद इलाके में तनाव बना हुआ है। 25 जून 2026 को Oman के तट के पास एक टैंकर पर ड्रोन हमले का शक ईरान पर गया था। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi का कहना है कि Strait of Hormuz में ईरान का सैन्य नियंत्रण रहेगा और वहां सर्विस फीस लेना सही है। वहीं, अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र है और यहां कोई भी देश पैसे या टोल नहीं वसूल सकता। UAE की मंत्री Lana Nusseibeh ने भी कहा कि इस रास्ते को सुरक्षित और खुला रखना जरूरी है।

आगे क्या होगा

अमेरिका अब ईरान के साथ कूटनीति के नए दौर में कदम रख रहा है। Marco Rubio ने कहा कि वे एक ऐसे समझौते के लिए तैयार हैं जिससे ईरान परमाणु हथियार न बना सके। इस पूरी प्रक्रिया में Gulf देशों से सलाह ली जाएगी। दूसरी ओर, Saudi Arabia जल्द ही ईरान और अरब Gulf देशों के बीच एक सुलह शिखर सम्मेलन (Reconciliation Summit) आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। Lebanon में युद्धविराम लागू करने के लिए Washington, Tehran और Beirut के बीच एक सिस्टम भी बनाया गया है।