ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच व्यापारिक रिश्ते एक बार फिर पटरी पर लौट आए हैं। अब दोनों देशों के बीच सामानों का लेनदेन फिर से शुरू हो गया है और आने वाले कुछ दिनों में हवाई यात्रा भी बहाल होगी। यह खबर उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो इन दोनों देशों के बीच व्यापार या यात्रा करते हैं।

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IRNA न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 जून 2026 को यह पुष्टि हुई कि यूएई के Jebel Ali पोर्ट से ईरान के लिए कंटेनरों की क्लीयरेंस का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही दोनों देशों की विमानन अथॉरिटी की मंजूरी के बाद 1 जुलाई 2026 से फ्लाइट्स का संचालन भी दोबारा शुरू होगा।

व्यापार और समुद्री रास्तों की बहाली

जानकारी के मुताबिक, 26 जून 2026 को एक युद्धविराम और समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद व्यापार और समुद्री ट्रैफिक फिर से चालू हुआ। इससे पहले 22 जून को अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटने और Strait of Hormuz के धीरे-धीरे खुलने के बाद ईरानी सामानों को ले जाने वाले जहाज कतर और यूएई के लिए रवाना हुए थे।

इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते से हुई। इस MoU का मकसद युद्ध को खत्म करना, समुद्री रास्तों को बहाल करना और ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील देना था। इस समझौते में पाबंदियों में राहत और संपत्तियों को अनलॉक करने जैसे 14 मुख्य बिंदु शामिल हैं।

नेताओं की बातचीत और शर्तें

27 जून को ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और यूएई के विदेश मंत्री Abdullah bin Zayed Al Nahyan ने क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया। हालांकि, Gulf Cooperation Council (GCC) के मंत्रियों ने साफ किया है कि ईरान के साथ व्यापार इस बात पर निर्भर करेगा कि वह समझौते का पालन करता है या नहीं और अपनी अस्थिर हरकतों को रोकता है या नहीं।

तनाव अब भी बरकरार

व्यापार शुरू होने के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। 27 जून को बहरीन ने अपनी जमीन पर ईरानी ड्रोन हमले का आरोप लगाया और इसे समझौते का उल्लंघन बताया। जवाब में ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

वहीं, Strait of Hormuz के नियंत्रण को लेकर भी ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद बने हुए हैं। ईरान के सांसद Ebrahim Azizi और संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf का कहना है कि इस समुद्री रास्ते का प्रबंधन ईरान ही करेगा, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि यहाँ कोई टोल नहीं लिया जाएगा।