संयुक्त अरब अमीरात में इजराइल के साथ अपनी दोस्ती सार्वजनिक मंच पर स्वीकार कर रिश्तो को आगे बढ़ाने का कार्य शुरू कर दिया है.  संयुक्त अरब अमीरात इस दोस्ती के साथ ही तरक्की मानवता और व्यापार के मायने सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत किए हैं और इसका ही आधार देकर कहा है कि दोनों देशों के बीच में सांस्कृतिक लेनदेन भी बढ़ेगा.

 लेकिन जहां एक ओर संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल के एक साथ खाने की खुशियां मनाई जा रही है वहीं दूसरी ओर काफी तीखी आलोचना भी की जा रही है जिसमें मुख्य रुप से इजराइल का गाजा के ऊपर किए जा रहे लगातार मानवता को शर्मसार करने वाले आक्रमण काफी चर्चा में है.

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 लोगों का कहना है कि फलस्तीन के नागरिकों के ऊपर किया जा रहा है जुल्म और एक अरब मुस्लिम देश का सार्वजनिक मंच से इसका स्वीकार होना इसे इतिहास कभी माफ नहीं कर पाएगा और शायद यह मुस्लिम वर्चस्व वाले देशों के लिए सबसे बुरा या बुरे सपने के तौर पर इसे देखा जाना चाहिए.

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 मानव अधिकार का हनन और किस से जुड़ी हुई एजेंशिया ना ही इस पर कोई टिप्पणी कर रही है ना ही इजराइल के द्वारा किए जा रहे लगातार हम लोग के ऊपर कोई सवाल उठा रहे हैं.  ऐसे में मदद के जगह संयुक्त अरब अमीरात का इजराइल के साथ हाथ मिला लेना एक पक्ष के लोगों को बेहतर नहीं लग रहा है.

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Lov Singh

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