यूएई सरकार ने देश के सरकारी डेटा और जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। यूएई साइबर सुरक्षा परिषद (UAE Cyber Security Council) ने अबू धाबी की सुरक्षा कंपनी ‘क्वांटम गेट’ (QuantumGate) के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर ‘क्रिप्टो डिस्कवरी टूल’ (Crypto Discovery Tool – CDT) को लॉन्च किया है। यह नया सिस्टम देश को भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों से होने वाले साइबर सुरक्षा खतरों से बचाने में मदद करेगा।

नए सुरक्षा नियम और सरकारी विभागों के लिए क्या हैं जरूरी गाइडलाइंस?

यूएई सरकार ने राष्ट्रीय एन्क्रिप्शन नीति (National Encryption Policy) के तहत सरकारी विभागों और संस्थानों के लिए कुछ कड़े नियम तय किए हैं। इस नए सुरक्षा ढांचे के तहत निम्नलिखित कार्य किए जाएंगे:

  • ट्रांसमिशन प्लान: सभी सरकारी विभागों को अपने पुराने सुरक्षा सिस्टम (जैसे RSA और ECC) से नए सुरक्षित सिस्टम पर जाने का पूरा रोडमैप बनाना होगा।
  • ऑटोमेटेड इन्वेंट्री: नए टूल की मदद से सरकारी विभागों को अपने सभी डिजिटल एसेट्स का रियल-टाइम रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
  • सुरक्षा की प्राथमिकता: ऐसे डेटा को सबसे पहले सुरक्षित किया जाएगा जो अगले 10 से 20 सालों तक गोपनीय रहने जरूरी हैं, जैसे स्वास्थ्य रिकॉर्ड, राष्ट्रीय सुरक्षा और वित्तीय रिकॉर्ड।

इस नए सुरक्षा टूल से यूएई को क्या फायदा मिलेगा?

यूएई सरकार के साइबर सुरक्षा प्रमुख डॉ. मोहम्मद अल-कुवैती ने बताया कि यह टूल देश के साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी है। इस स्वदेशी सिस्टम के जरिए सरकार पूरे देश के महत्वपूर्ण संस्थानों के साइबर सुरक्षा स्तर पर नजर रख सकेगी। क्वांटम गेट की सीईओ डॉ. नजवा आराइज ने भी कहा कि इस टूल की मदद से उन खतरों को समय से पहले पहचाना जा सकेगा जो अभी तक दिखाई नहीं देते थे, जिससे साइबर सुरक्षा को पहले से मजबूत बनाया जा सकेगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

यूएई का क्रिप्टो डिस्कवरी टूल (CDT) क्या है?

यह अबू धाबी में बना एक विशेष सुरक्षा टूल है जो सरकारी और महत्वपूर्ण संस्थानों के डेटा की निगरानी करता है और उन्हें भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों से होने वाले साइबर हमलों से सुरक्षित बनाता है।

यह नया सुरक्षा नियम कब से और क्यों लागू किया गया है?

यह नियम यूएई की राष्ट्रीय एन्क्रिप्शन नीति के तहत लागू किया गया है, जिसे साल 2025 के अंत में मंजूरी मिली थी और फरवरी 2026 में इसके नियम जारी किए गए थे, ताकि देश का संवेदनशील डेटा सुरक्षित रहे।