UAE सरकार ने अल्जाइमर बीमारी को रोकने के लिए अपना पहला जेनोमिक्स-आधारित क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया है. इस पहल का मकसद जेनेटिक डेटा की मदद से उन लोगों की पहचान करना है जिन्हें भविष्य में यह बीमारी होने का खतरा है. इससे लक्षणों के दिखने से पहले ही सही इलाज और मेडिकल मदद दी जा सकेगी.

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यह ट्रायल 29 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ. इस बड़े प्रोजेक्ट को M42 के Insights Research Organisation and Solutions (IROS), Department of Health – Abu Dhabi (DoH) और अमेरिका की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Halia Therapeutics मिलकर चला रहे हैं.

कैसे काम करेगा यह ट्रायल

इस रिसर्च में Emirati Genome Programme (EGP) के डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिसमें अब तक 900,000 से ज़्यादा लोगों के जीनोम की जांच हो चुकी है. टीम उन लोगों को ढूंढेगी जिनमें APOE4 जीन वेरिएंट मौजूद है, क्योंकि यह अल्जाइमर के खतरे को बढ़ाता है. जिन लोगों में यह रिस्क पाया जाएगा, उन्हें Department of Health द्वारा स्क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग के लिए बुलाया जाएगा.

इस ट्रायल के दौरान Halia Therapeutics द्वारा बनाई गई HT-4253 नाम की एक नई दवा का परीक्षण किया जाएगा. इसका लक्ष्य बीमारी की शुरुआत को धीमा करना या उसे पूरी तरह रोकना है.

सरकारी नियम और इंफ्रास्ट्रक्चर

यह पूरा काम अबू धाबी में होगा और इसमें M42 के रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और Malaffi हेल्थ इंफॉर्मेशन एक्सचेंज का इस्तेमाल किया जाएगा. UAE के नए कानूनों ने ऐसे रिसर्च को आसान बनाया है. Federal Decree-Law No. 28 of 2023 के तहत Emirates Drug Establishment (EDE) को मेडिकल प्रोडक्ट्स और रिसर्च की देखरेख की जिम्मेदारी दी गई है. साथ ही 2 जनवरी 2025 से लागू Pharmacy Law 38 ने देश में क्लिनिकल रिसर्च के नियमों को और मजबूत किया है.

अधिकारियों ने क्या कहा

  • Dr. Noura Al Ghaithi (Undersecretary, DoH – Abu Dhabi) ने बताया कि जेनोमिक डेटा की मदद से बीमारियों का खतरा पहले पता चलेगा और इलाज ज़्यादा बेहतर होगा.
  • Albarah El-Khani (COO, M42) ने कहा कि नेशनल जेनेटिक डेटा और नई थेरेपी का मेल उन लोगों की मदद करेगा जो अब तक ग्लोबल रिसर्च में शामिल नहीं थे.
  • David Kavanagh (Interim GM, IROS) ने इसे UAE के पिछले दस सालों के जेनोमिक निवेश का नतीजा बताया.

अन्य महत्वपूर्ण अपडेट्स

अल्जाइमर के खिलाफ UAE की कोशिशें पहले से जारी हैं. अप्रैल 2025 में अबू धाबी ने APOE जेनेटिक टेस्टिंग को अपनी रिपोर्ट्स में शामिल किया था ताकि मरीजों को उनके जीन के हिसाब से दवा दी जा सके. इसके अलावा, जनवरी 2026 में Reem Hospital और IROS ने मिलकर एक और ट्रायल पूरा किया था, जिसमें स्थानीय अमीराती आबादी पर दवा की सुरक्षा की जांच की गई थी.