संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अब शादियों के फिजूलखर्च को रोकने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी दिशा में अल दारेई परिवार ने एक मिसाल पेश की है। मोहम्मद सलीम अल दारेई ने अपनी बहन की शादी बिना किसी बड़े समारोह के कराई है, ताकि युवा इस आर्थिक बोझ से बच सकें।
यह अल दारेई परिवार का ऐसा दूसरा मौका है जब उन्होंने बिना किसी तामझाम के शादी कराई। परिवार का कहना है कि वे देश के नेतृत्व के आदेशों का पालन कर रहे हैं, जो शादी के खर्चों को कम करने और दिखावे से दूर रहने की बात करते हैं। परिवार के मुताबिक, महंगे दहेज और दिखावे की शादियां उनके समाज के लिए सही नहीं हैं और वे सादगी को बढ़ावा देना चाहते हैं।
सरकार भी युवाओं की मदद के लिए कई प्रोग्राम चला रही है। अबू धाबी में ‘मदीम’ (Medeem) पहल शुरू की गई है, जिसका मकसद युवाओं को किफायती शादियों के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 तक अबू धाबी में 26% शादियां इसी मॉडल पर हुई हैं, जिससे शादी के खर्च में 41% से ज्यादा की कमी आई है। अब तक 1,343 शादियां इस मॉडल के तहत आयोजित की जा चुकी हैं।
दुबई में कम्युनिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी (CDA) ने ‘दुबई वेडिंग प्रोग्राम’ शुरू किया है। इस प्रोग्राम के तहत 250 मेहमानों तक के समारोह का खर्च सरकार उठाती है, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि दूल्हा दुबई का नागरिक हो और दुल्हन UAE की। इसके साथ ही, शेख जायद मैरिज फंड पहली बार शादी करने वाले पात्र अमीराती पुरुषों को 70,000 दिरहम की आर्थिक मदद देता है ताकि वे अपना घर बसा सकें।
शादियों को लेकर कुछ नए नियम भी लागू किए गए हैं। जनवरी 2025 से सभी अमीराती जोड़ों के लिए जेनेटिक टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, एक नए कानून के तहत अब शादी करने वाले अमीराती जोड़ों को 10 दिन की शादी की छुट्टी (Marriage Leave) भी मिलेगी।
