UAE की बड़ी कूटनीति, रूस और यूक्रेन के बीच 206 कैदियों का हुआ सफल आदान-प्रदान

Sushma Kumari19 August 20262 min read42 viewsUAE
UAE की बड़ी कूटनीति, रूस और यूक्रेन के बीच 206 कैदियों का हुआ सफल आदान-प्रदान

संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने एक बार फिर अपनी शानदार मध्यस्थता से दुनिया भर में मानवता का बड़ा संदेश दिया है। 19 अगस्त 2026 को यूएई ने रूस और यूक्रेन के बीच अपनी 26वीं सफल मध्यस्थता को पूरा किया, जिसके तहत दोनों देशों के बीच कुल 206 कैदियों को सुरक्षित वापस उनके घर भेजा गया। इस पूरी प्रक्रिया में दोनों पक्षों की तरफ से 103-103 कैदियों को एक-दूसरे को सौंपा गया, जो दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर है।

रूस के रक्षा मंत्रालय ने की यूएई की तारीफ

रूस के रक्षा मंत्रालय ने इस सफल कैदी अदला-बदली की आधिकारिक पुष्टि की है और मध्यस्थता के लिए यूएई की खुलकर प्रशंसा की है। मंत्रालय के अनुसार, रूस के जिन सैनिकों को इस अदला-बदली के दौरान रिहा किया गया है, वे सभी इस समय बेलारूस में मौजूद हैं। वहां रूस की मानवाधिकार कमिश्नर याना लांत्रातोवा (Yana Lantratova) इन सभी रिहा किए गए सैनिकों की पूरी निगरानी कर रही हैं और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान कर रही हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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रूस लौटने पर मिलेगा खास मेडिकल ट्रीटमेंट

बेलारूस में शुरुआती प्रक्रिया और देखभाल पूरी होने के बाद, इन सभी सैनिकों को सुरक्षित रूप से रूसी संघ ले जाया जाएगा। रूस पहुंचने पर इन सभी को विशेष चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पतालों में भर्ती कराया जाएगा, जहां उनका व्यापक इलाज किया जाएगा। इसके अलावा, युद्ध और कैद के दौरान मानसिक और शारीरिक रूप से टूटे इन सैनिकों को विशेष रूप से शारीरिक और मनोवैज्ञानिक पुनर्वास (rehabilitation) से गुजरना होगा ताकि वे जल्द से जल्द अपनी सामान्य जिंदगी में वापस लौट सकें।

यूएई की मध्यस्थता का बड़ा रिकॉर्ड

आपको बता दें कि यूएई लगातार दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने और मानवीय आधार पर कैदियों को छुड़ाने के लिए प्रयास करता रहा है। इन ताजा आंकड़ों को मिलाने के बाद अब तक रूस और यूक्रेन के बीच यूएई के प्रयासों से कुल 7,997 कैदियों की अदला-बदली हो चुकी है। खाड़ी देशों में यूएई की यह भूमिका पूरी दुनिया में शांति और मानवता के लिए एक बड़ा उदाहरण बन चुकी है, जिससे आम लोगों को भी यह उम्मीद बंधती है कि बड़े विवादों को भी बातचीत और सूझबूझ से सुलझाया जा सकता है।

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