UAE की राज्य मंत्री Lana Nusseibeh ने ईरान के साथ होने वाली शांति बातचीत में खाड़ी देशों की मौजूदगी को बेहद जरूरी बताया है. यह बात उन्होंने बहरीन के मनामा में GCC और अमेरिका के बीच हुई एक बड़ी मीटिंग के दौरान कही. उनका कहना है कि अगर इलाके में लंबे समय तक शांति चाहिए, तो उन देशों की राय लेना ज़रूरी है जिन्होंने ईरान के हमलों को सीधे तौर पर झेला है.
GCC और अमेरिका की मीटिंग में हुई चर्चा
यह अहम बैठक 25 और 26 जून 2026 को बहरीन में आयोजित की गई थी. इस दौरान UAE मंत्री Lana Nusseibeh ने साफ तौर पर कहा कि खाड़ी देशों की सलाह और उनकी भागीदारी एक अनिवार्य शर्त है. उन्होंने तर्क दिया कि अगर समाधान में खाड़ी देशों के नजरिए को शामिल किया जाएगा, तो यह सुरक्षा के लिहाज से ज़्यादा मज़बूत होगा.
ईरान के साथ समझौते और शर्तें
मीटिंग में 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MoU) का स्वागत किया गया. इसे क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में पहला कदम माना गया. हालांकि, मंत्रियों ने यह भी साफ किया कि स्थाई शांति के लिए ईरान को अपनी हरकतों को पूरी तरह रोकना होगा. इसके लिए कुछ मुख्य बातें सामने आईं:
- ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन और उसके गुटों (proxies) द्वारा फैलाए जा रहे खतरों को खत्म करना होगा.
- ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
- ईरान के साथ भविष्य में व्यापार और निवेश तभी संभव होगा जब वह समझौते का पालन करेगा और अपनी अस्थिर करने वाली गतिविधियों को बंद करेगा.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ और सुरक्षा
UAE और GCC देशों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को खुला और सुरक्षित रखना चाहिए. उन्होंने किसी भी तरह के टोल या फीस लगाने और इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण करने की कोशिशों को खारिज कर दिया. अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी मीटिंग में कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र है और ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे.
पुराने हमले और कड़ा रुख
Lana Nusseibeh ने याद दिलाया कि UAE ने अब तक 1800 से ज़्यादा मिसाइलों और प्रोजेक्टाइल्स को रोका है, जिनमें से ज़्यादातर नागरिक इलाकों को निशाना बना रहे थे. उन्होंने मार्च 2026 में एक इंटरव्यू में यह भी कहा था कि ईरान के साथ कूटनीति तभी शुरू हो सकती है जब तेहरान पूरे इलाके में अपने हमले बंद कर दे.
