यूएई सरकार ने देश में लोगों की सेहत सुधारने के लिए एक बड़ी योजना पर काम शुरू किया है। नेशनल न्यूट्रिशन स्ट्रैटेजी (2022-2030) के तहत खाने-पीने की चीजों से खतरनाक ट्रांस फैट (Trans Fat) को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। यह फैसला खासतौर पर दिल की बीमारियों और मोटापे जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए लिया गया है। इस नए नियम का सीधा असर उन प्रवासियों और परिवारों पर पड़ेगा जो रोजाना बाहर के खाने या पैकेट बंद चीजों का इस्तेमाल करते हैं।

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नया नियम क्या है और इससे क्या बदलेगा?

यूएई के स्वास्थ्य और रोकथाम मंत्रालय (MoHAP) ने 2030 तक ट्रांस फैट को लगभग खत्म करने का लक्ष्य बनाया है। पहले खाने की चीजों में 5% तक ट्रांस फैट की अनुमति थी, लेकिन अब इसे घटाकर अधिकतम 2% तक सीमित किया जाएगा। सरकार का मुख्य ध्यान आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेल (Partially Hydrogenated Oil) पर है, जो सेहत के लिए सबसे अधिक नुकसानदायक माना जाता है। इससे फूड इंडस्ट्री और स्कूलों में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

ट्रांस फैट पर पाबंदी से जुड़ी मुख्य बातें

मुख्य बिंदु विवरण
रणनीति का नाम नेशनल न्यूट्रिशन स्ट्रैटेजी 2022-2030
नया मानक अधिकतम 2% ट्रांस फैट की सीमा
प्रमुख लक्ष्य 2030 तक औद्योगिक ट्रांस फैट को हटाना
संबंधित संस्थाएं MoHAP, उद्योग मंत्रालय और WHO
सेहत पर असर कोलेस्ट्रॉल कम करना और दिल को सुरक्षित रखना

प्रवासियों और परिवारों पर क्या असर होगा?

यूएई में रहने वाले लाखों भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह एक अच्छी खबर है क्योंकि अब बाजार में मिलने वाले तेल और वसा युक्त उत्पादों में मिलावट कम होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांस फैट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को कम करता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। स्कूलों में भी अब हेल्दी विकल्पों को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे बच्चों को बेहतर और सुरक्षित भोजन मिल सके। सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर नमक और चीनी की मात्रा कम करने पर भी काम कर रही है।