संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सरकार ने देश में बच्चों के पालन-पोषण (Foster Care) से जुड़े नियमों में बहुत बड़ा बदलाव किया है। फेडरल डिक्री-लॉ नंबर 12 लागू होने के बाद अब न केवल अमीराती बल्कि विदेशी नागरिक (Expats) भी बच्चों को फॉस्टर केयर में ले सकेंगे। इस नए कानून के जरिए सरकार ने फॉस्टर बच्चों के नाम, पहचान पत्र और उनके अधिकारों से जुड़ी कई पुरानी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया है।

UAE के नए कानून में फॉस्टर केयर के लिए क्या हैं योग्यताएं?

नए कानून के तहत फॉस्टर केयर के नियमों को काफी उदार बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक बच्चों को सुरक्षित घर मिल सके। इसके तहत मुख्य नियम इस प्रकार हैं:

  • अब विदेशी शादीशुदा जोड़े भी बच्चा फॉस्टर करने के लिए पात्र हैं, बशर्ते दोनों पति-पत्नी की उम्र कम से कम 25 साल हो।
  • 30 साल या उससे अधिक उम्र की अकेली महिलाएं भी इसके लिए आवेदन कर सकती हैं, और उनके लिए अधिकतम उम्र की कोई सीमा नहीं है।
  • यह नियम सभी राष्ट्रीयताओं और धर्मों के लोगों पर समान रूप से लागू होता है।
  • आवेदन करने वाले माता-पिता के पास बच्चे के पालन-पोषण के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता होनी चाहिए और वे किसी भी संक्रामक या मानसिक बीमारी से मुक्त होने चाहिए।

बच्चों के नाम, कानूनी पहचान और अधिकारों पर क्या है नया नियम?

इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बच्चों को कानूनी पहचान देना है। इसके तहत बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र और पहचान पत्र जारी किए जाएंगे जिससे उनके दैनिक जीवन और समाज में एकीकरण में आसानी होगी।

कानून के अनुसार, फॉस्टर माता-पिता को बच्चे की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और धार्मिक पहचान का सम्मान करना होगा और वे अपनी मान्यताएं बच्चे पर जबरन नहीं थोप सकते। इसके साथ ही यह व्यवस्था पारंपरिक गोद लेने (Adoption) से अलग है। इसे इस्लाम में ‘कफाला’ कहा जाता है, जिसमें बच्चे का मूल वंश और पारिवारिक नाम बरकरार रहता है और उसे फॉस्टर परिवार से स्वचालित रूप से विरासत का अधिकार नहीं मिलता है। वदीमा कानून के तहत बच्चे का नाम ऐसा होना चाहिए जो समाज के अनुकूल हो और जिससे उसकी पहचान को कोई ठेस न पहुंचे।

विशेषज्ञों और अभिभावकों की इस कानून पर क्या है प्रतिक्रिया?

कानूनी विशेषज्ञ और मध्यस्थ शबाना सलीम ने इस कानून का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अधिक बच्चों को अपने ही समुदाय में रहने का अवसर मिलेगा। कानून विशेषज्ञ हेशाम अल राफेई ने इसे यूएई की उस रणनीति का हिस्सा बताया जिसके तहत दुनिया भर के कुशल पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए पारिवारिक कानूनों को आधुनिक बनाया जा रहा है। हालांकि, अमीराती फॉस्टर मां नर्जेस अली ने चिंता जताई कि प्रवासियों का निवास अक्सर अस्थायी और नौकरी पर निर्भर होता है, जिससे बच्चों की दीर्घकालिक सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या यूएई में रहने वाले प्रवासी (Expats) बच्चे को फॉस्टर कर सकते हैं?

हां, नए कानून के तहत कम से कम 25 वर्ष की आयु के विदेशी शादीशुदा जोड़े और 30 वर्ष से अधिक आयु की अकेली प्रवासी महिलाएं बच्चा फॉस्टर करने के लिए पात्र हैं।

क्या फॉस्टर बच्चों को परिवार का नाम और विरासत का अधिकार मिलता है?

नहीं, यह व्यवस्था कफाला पर आधारित है। बच्चे का अपना मूल नाम और जैविक वंश बना रहता है, और उसे फॉस्टर परिवार से स्वचालित विरासत अधिकार नहीं मिलता है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.