UAE सरकार ने बच्चों को इंटरनेट की दुनिया में होने वाले फ्रॉड और खतरों से बचाने के लिए नए और कड़े नियम लागू किए हैं. अब 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाना मना कर दिया गया है. अधिकारियों ने माता-पिता को चेतावनी दी है कि वे अपने बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल पर पूरी नज़र रखें.
सोशल मीडिया पर पाबंदी और नया नियम
18 जून 2026 को UAE में एक नया फैसला आया जिसके तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों के पर्सनल सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या उनके फीचर्स इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है. डॉक्टरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि ज़्यादा सोशल मीडिया चलाने से बच्चों की नींद, पढ़ाई और उनके आत्मविश्वास पर बुरा असर पड़ता है.
ऑनलाइन स्कैम और दुबई पुलिस की चेतावनी
17 जून 2026 को दुबई प्रशासन ने बच्चों के डिवाइस के ज़रिए परिवार की निजी जानकारी चुराने वाले स्कैमर्स के बारे में अलर्ट जारी किया. साइबर सुरक्षा शोधकर्ता Bashayer Al-Salami ने बताया कि स्कैमर्स बच्चों की नासमझी का फायदा उठाकर उन्हें कॉल करते हैं और जानकारी निकालते हैं. कानूनी विशेषज्ञ Rashid Al-Hafiti ने कहा कि सरकारी अधिकारियों के नाम पर धोखाधड़ी करना UAE फेडरल लॉ नंबर (34) 2021 के तहत एक गंभीर अपराध है और इसमें कड़ी सज़ा का प्रावधान है.
Child Digital Safety Law और माता-पिता की ज़िम्मेदारी
UAE में 26 जनवरी 2026 से Child Digital Safety Law लागू हो गया है. इस कानून के तहत अब यह माता-पिता और गार्जियन की कानूनी ज़िम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी करें. साथ ही, बड़ी टेक कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स को अब उम्र की जाँच (Age Verification), कंटेंट फिल्टर और बच्चों के लिए विज्ञापन पर सख्त पाबंदी लगानी होगी.
इन खतरों से रहें सावधान
UAE Cybersecurity Council और दुबई-शारजाह पुलिस ने कई तरह के ऑनलाइन खतरों के प्रति आगाह किया है:
- Telegram फ्रॉड: स्कैमर्स पुलिस या बैंक अधिकारी बनकर बच्चों से बैंक डिटेल्स या OTP माँगते हैं.
- गेमिंग स्कैम: ऑनलाइन गेम्स में स्कोर बढ़ाने या स्पेशल फीचर्स देने के बहाने माता-पिता के बैंक कार्ड की जानकारी ली जाती है.
- फिशिंग: फर्जी मैसेज भेजकर अकाउंट हैक करने की कोशिश की जाती है.
- डीपफेक: आजकल डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर लोगों को ठगा जा रहा है.
शारजाह पुलिस ने “Be Aware” नाम से मुहिम शुरू की है ताकि लोगों को डिजिटल अपराधों के बारे में सिखाया जा सके. दुबई पुलिस का साइबर क्राइम विभाग खास तौर पर छुट्टियों के दौरान अलर्ट रहने की सलाह देता है क्योंकि उस समय बच्चे ज़्यादा समय स्क्रीन पर बिताते हैं.