संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर आ रही है। भारत सरकार के आयकर विभाग ने टैक्स नियमों और कर व्यवस्था में बड़े बदलावों की तैयारी कर ली है। यदि आप भी यूएई में रहकर भारत में निवेश करते हैं या वहां अपनी संपत्ति रखते हैं, तो आपको नए आईटीआर (ITR) नियमों के बारे में समय रहते पूरी जानकारी होनी चाहिए। नए नियमों के लागू होने के बाद आपके पुराने कई फॉर्म्स के नाम भी बदलने जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
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अप्रैल 2026 से बदलने जा रहे हैं ये मुख्य टैक्स फॉर्म्स
भारत सरकार का कर प्रशासन अप्रैल 2026 से प्रस्तावित नए आयकर नियम, 2026 के तहत एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इसके तहत कई सामान्य रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मों के नाम बदल दिए जाएंगे। कर पेशेवरों और चार्टर्ड एकाउंटेंट जैसे दीक्षित जैन (डायरेक्टर, द टैक्स एक्सपर्ट्स DMCC) ने प्रवासियों को इसके लिए पहले से तैयार रहने की सलाह दी है। नए बदलावों की सूची नीचे दी गई है।
| पुराना फॉर्म नाम | नया फॉर्म नाम (अप्रैल 2026 से लागू) |
|---|---|
| फॉर्म 16 (सैलरी और टैक्स कटौती के लिए) | फॉर्म 130 |
| फॉर्म 26AS (टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट) | फॉर्म 168 |
| फॉर्म 15G और 15H (टीडीएस छूट के लिए) | फॉर्म 121 |
| विदेशी प्रेषण के लिए फॉर्म 15CA | फॉर्म 145 |
| विदेशी प्रेषण के लिए फॉर्म 15CB | फॉर्म 146 |
अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए निवास स्थिति और डीम्ड रेजिडेंसी नियम क्या हैं?
भारत में बिताए गए दिनों की संख्या आपकी टैक्स देनदारियों को तय करती है। नए नियमों के तहत उच्च आय वाले अनिवासी भारतीयों के लिए भारत में रहने की सीमा को 60 दिनों से बढ़ाकर 120 दिन कर दिया गया है, बशर्ते उनकी भारतीय स्रोतों से कुल आय 15 लाख रुपये से अधिक हो।
इसके अलावा डीम्ड रेजिडेंसी नियम (धारा 6(1A)) के अनुसार, जो भारतीय नागरिक भारत के बाहर से 15 लाख रुपये या उससे अधिक कमाते हैं और किसी अन्य देश में टैक्स देने के पात्र नहीं हैं, जैसे यूएई जहां व्यक्तिगत आयकर नहीं है, उन्हें भारत का निवासी (RNOR) माना जाएगा। हालांकि, भारत-यूएई दोहरा कराधान बचाव समझौता (DTAA) प्रवासियों को एक ही आय पर दो बार टैक्स देने से बचाता है, जिससे यूएई की सैलरी पर भारत में टैक्स नहीं लगता है।
टैक्स भरने में देरी करने पर कितना लगेगा जुर्माना और क्या रखनी होगी तैयारी?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई प्रवासी 31 जुलाई 2026 की समय-सीमा के बाद अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करता है, तो उसे 5,000 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। इसके अलावा देरी से रिटर्न फाइल करने पर टैक्स रिफंड मिलने में भी देरी होती है और कई तरह के टैक्स लाभ भी नहीं मिल पाते हैं।
प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी रिकॉर्ड जैसे NRO, NRE बैंक खातों के स्टेटमेंट, किराया समझौते, ब्याज प्रमाण पत्र, संपत्ति के दस्तावेज, पूंजीगत लाभ की रिपोर्ट और पहचान पत्र (जैसे आधार, पैन, पासपोर्ट, वीजा और अमीरात आईडी) सुरक्षित रखें ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें प्रस्तुत किया जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यूएई में रहने वाले भारतीयों के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 का आईटीआर भरने की अंतिम तिथि क्या है?
यूएई में रहने वाले अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 का आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 तय की गई है। समय पर आईटीआर न भरने पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
क्या यूएई में मिलने वाले वेतन पर भारत में टैक्स देना होगा?
नहीं, भारत-यूएई दोहरा कराधान बचाव समझौते (DTAA) के तहत यूएई में अर्जित वेतन पर भारत में टैक्स नहीं लगता है क्योंकि यूएई में कोई व्यक्तिगत आयकर नहीं है। हालांकि, भारत में किए गए निवेश और संपत्ति से होने वाली आय पर टैक्स देना होगा।
डीम्ड रेजिडेंसी का नियम किन प्रवासियों पर लागू होता है?
यह नियम उन भारतीय नागरिकों पर लागू होता है जो भारतीय स्रोतों से 15 लाख रुपये या उससे अधिक कमाते हैं और यूएई जैसे कर-मुक्त देशों में रहते हैं जहां व्यक्तिगत आयकर नहीं देना होता है। उन्हें भारत का ‘रेजिडेंट नॉट ऑर्डिनरीली रेजिडेंट’ (RNOR) माना जाएगा।