UAE आज अपनी ऊंची इमारतों और तेल की दौलत के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन एक दौर ऐसा था जब यहां सब कुछ अलग था। तेल मिलने और फ्री ज़ोन बनने से बहुत पहले, यहां के लोग मोतियों की खोज, नाव बनाने और बुनाई जैसे कामों से अपना घर चलाते थे। यह वो समय था जब समंदर ही यहां के लोगों की रोजी-रोटी का सबसे बड़ा जरिया था और पूरी अर्थव्यवस्था इसी पर टिकी थी।

मोतियों की खोज और पुराने समय का बिजनेस मॉडल क्या था?

UAE में मोतियों की खोज का काम 7,000 साल से भी ज्यादा पुराना है। 19वीं सदी के आखिर और 20वीं सदी की शुरुआत में यह काम यहां की अर्थव्यवस्था का सबसे मुख्य हिस्सा बन गया था। इस उद्योग में काम करने का एक खास तरीका था जिसमें एक hierarchy होती थी। सबसे ऊपर फाइनेंस करने वाले लोग थे, उनके नीचे स्थानीय व्यापारी जिन्हें Tujar कहा जाता था, फिर बिचौलिए जिन्हें Tawawish कहते थे, और फिर जहाज के कप्तान जिन्हें Nawakhodha कहा जाता था। सबसे नीचे गोताखोर Ghawasin और उनकी मदद करने वाले Siyub होते थे। अगर किसी सीजन में मोती नहीं मिलते थे, तो उसका कर्ज नाव मालिकों और गोताखोरों के परिवारों पर आ जाता था, जिससे समुदाय में काफी आर्थिक तनाव पैदा होता था।

मोतियों का कारोबार कैसे खत्म हुआ और तेल की शुरुआत कब हुई?

1920 के दशक के अंत और 1930 की शुरुआत में मोतियों का यह चमकता कारोबार गिरने लगा। इसकी मुख्य वजह दुनिया भर में आई आर्थिक मंदी और जापान द्वारा लैब में बनाए गए कल्चरल पर्ल्स का बाजार में आना था। जब मोतियों की मांग कम हुई, तब तेल की खोज शुरू हुई। 1930 की शुरुआत में तेल कंपनियों की टीमों ने UAE में geological surveys किए। इसके बाद Abu Dhabi से कच्चे तेल का पहला कार्गो 1962 में निर्यात किया गया, जिसने देश की आर्थिक दिशा पूरी तरह बदल दी।

पुराने दौर की यादें और आज की नई पहल क्या हैं?

आज की सरकार और विभिन्न संस्थाएं इस पुरानी विरासत को बचाने की कोशिश कर रही हैं। Environment Agency in Abu Dhabi (EAD) और FAO मिलकर टिकाऊ तरीके से मोतियों की खेती को फिर से शुरू करने पर काम कर रहे हैं। Ras Al Khaimah में Suwaidi Pearls जैसी संस्थाएं प्राकृतिक मोती पालन और पर्यटन के जरिए इस संस्कृति को जिंदा रख रही हैं। इस मुहिम में UAE का Ministry of Climate Change and Environment भी सहयोग कर रहा है ताकि पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें। पुराने समय में नाव बनाने वाले बढ़ई पारंपरिक लकड़ी की नावें बनाते थे जिन्हें Jalboot कहा जाता था, जिसका महत्व आज भी इतिहास में दर्ज है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

UAE में मोतियों का कारोबार कब और क्यों कम हुआ?

1920 के दशक के अंत और 1930 की शुरुआत में वैश्विक आर्थिक मंदी और जापान द्वारा बनाए गए कल्चरल पर्ल्स के कारण मोतियों की मांग गिर गई और यह कारोबार कम हो गया।

UAE से तेल का पहला निर्यात कब हुआ था?

Abu Dhabi से कच्चे तेल का पहला कार्गो साल 1962 में निर्यात किया गया था, जिससे देश में नए आर्थिक युग की शुरुआत हुई।