UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और नाटो (NATO) के महासचिव मार्क रुटे के बीच फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। इस चर्चा का मुख्य केंद्र क्षेत्र में बढ़ता तनाव और इसका अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाला असर था। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। नाटो प्रमुख ने इस मुश्किल समय में यूएई की ओर से की जा रही कोशिशों और शांति बनाए रखने के कदमों की सराहना की है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और हालिया हमलों को लेकर क्या हुई बातचीत?

23 और 24 मार्च 2026 को हुई इस बातचीत में ईरान की ओर से किए जा रहे हमलों को लेकर चिंता जताई गई। यूएई रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हाल ही में 7 बैलिस्टिक मिसाइलों और 16 ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया गया है। नाटो महासचिव ने इन हमलों की निंदा करते हुए इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया। शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने स्पष्ट किया कि यूएई अपनी सुरक्षा के लिए संप्रभु फैसले लेने का अधिकार रखता है और किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएगा। हमलों के आंकड़ों को नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है।

हथियार का प्रकार कुल संख्या (जो नष्ट किए गए)
बैलिस्टिक मिसाइलें 352
क्रूज मिसाइलें 15
ड्रोन (UAVs) 1789

समुद्री व्यापार और आम जनता पर इसका क्या असर होगा?

Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूएई और बहरीन सहित 22 देशों का एक गठबंधन बनाया गया है। यह गठबंधन समुद्री रास्तों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए काम करेगा। इस तनाव का सीधा असर आम लोगों, विशेषकर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर भी पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ती हलचल के कारण ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है, जिससे हवाई यात्रा महंगी होने के संकेत मिल रहे हैं। भारत और अन्य देशों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को आने वाले समय में फ्लाइट टिकटों के लिए अधिक जेब ढीली करनी पड़ सकती है और उड़ानों के रूट में भी बदलाव देखा जा सकता है।