संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में पिछले साल 16 अप्रैल को हुई मूसलाधार बारिश ने सबको चौंका दिया था। अब NYU Abu Dhabi के वैज्ञानिकों ने इसके पीछे की असली वजह खोज निकाली है। नई रिसर्च में पता चला है कि अरब सागर (Arabian Sea) में पानी का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा गर्म हो गया था। इसी गर्मी के कारण हवा में नमी बढ़ गई और भयानक तूफान आया जिसने दुबई और अबु धाबी जैसे शहरों को थाम दिया था।
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समुद्र का तापमान और तूफ़ान का कनेक्शन
NYU अबू धाबी के मुबाडाला एक्सेस सेंटर की रिसर्च बताती है कि उस समय समुद्र की सतह का तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वैज्ञानिकों ने पाया कि गर्म पानी की वजह से हवा में नमी की मात्रा बहुत ज्यादा हो गई थी। जब मौसम का सिस्टम इस इलाके से गुजरा, तो उसने इस नमी को खींच लिया और इसे भारी बारिश में बदल दिया। अगर समुद्र का पानी इतना गर्म नहीं होता, तो शायद बारिश इतनी तेज़ नहीं होती और हालात इतने नहीं बिगड़ते।
स्टडी में यह बात सामने आई है कि बड़े स्तर पर वायुमंडलीय बदलाव तो हो ही रहे थे, लेकिन समुद्र की गर्मी ने ‘आग में घी’ का काम किया। इससे तूफ़ान और ज्यादा ताकतवर हो गया और गरज के साथ भारी बारिश हुई। शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडल के जरिए यह समझा कि समुद्र के तापमान ने कैसे बारिश की मात्रा को बढ़ाया।
16 अप्रैल 2024 का वो रिकॉर्ड तोड़ दिन
16 अप्रैल 2024 का दिन UAE के इतिहास में सबसे ज्यादा बारिश वाले दिनों में गिना जाता है। उस दिन अल ऐन के ‘खतम अल शक्ला’ इलाके में 24 घंटे के अंदर 254.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी। यह 1949 के बाद से देश में हुई सबसे भारी बारिश थी। इस घटना ने आम जनजीवन को काफी प्रभावित किया था और कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए थे।
इस रिसर्च को बासित खान और उनकी टीम ने लीड किया है। इसमें बताया गया है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन कैसे हमारे मौसम पर सीधा असर डाल रहे हैं। मुबाडाला अरेबियन सेंटर फॉर क्लाइमेट एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज (Mubadala ACCESS) की यह रिपोर्ट भविष्य के मौसम को समझने में मददगार साबित होगी।
