UAE के स्टेट पब्लिक प्रोसिक्यूशन ने केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) अपराधों की जांच और कार्रवाई के लिए एक खास क्षेत्रीय प्रोग्राम पूरा किया है. यह ट्रेनिंग प्रोग्राम 5 महीने तक चला, जिसे UAE के अटॉर्नी जनरल काउंसलर डॉ. हमद सैफ अल शमसी के संरक्षण में आयोजित किया गया. इस प्रोग्राम का मकसद खतरनाक हथियारों और केमिकल हमलों जैसी गंभीर घटनाओं से निपटने के लिए कानूनी ढांचे और सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करना है.

ट्रेनिंग प्रोग्राम में किन देशों ने लिया हिस्सा और क्या हुआ

इस स्पेशल प्रोग्राम में UAE के अलग-अलग सरकारी विभागों के अलावा कुवैत, ओमान और कतर के अधिकारियों ने भी शिरकत की. कुल 45 प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया, जिससे इस ट्रेनिंग को क्षेत्रीय स्वरूप मिला. प्रोग्राम के दौरान कानूनी बारीकियों के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई, जिसमें आखिरी चरण में एक मॉक ट्रायल (नकली मुकदमा) आयोजित किया गया ताकि असल मामलों को संभालने का अनुभव मिल सके.

इस पहल में European Union (EU) के CBRN सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और संयुक्त राष्ट्र के UNICRI जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने तकनीकी और संस्थागत सहयोग दिया. EU की राजदूत लूसी बर्गर ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया ताकि सीमा पार होने वाले ऐसे गंभीर अपराधों को रोका जा सके.

खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल पर UAE के कड़े कानून

UAE ने ऐसे अपराधों को रोकने के लिए बहुत सख्त नियम बनाए हैं. Federal Law (7) of 2014 के तहत आतंकवाद के मकसद से गैर-पारंपरिक हथियारों (जैसे जहरीले केमिकल या बायोलॉजिकल एजेंट) का निर्माण, आयात या निर्यात करना पूरी तरह प्रतिबंधित है. इस कानून के अनुच्छेद 7 (1) का उल्लंघन करने वालों को उम्रकैद की सजा हो सकती है.

  • आतंकवादी हमला: अगर गैर-पारंपरिक हथियारों का इस्तेमाल आतंकवादी उद्देश्यों के लिए किया जाता है, तो सजा उम्रकैद से लेकर मौत तक हो सकती है.
  • सुविधाओं को नुकसान: किसी बायोलॉजिकल फैसिलिटी को नुकसान पहुँचाना जिससे खतरनाक एजेंट बाहर फैलें, इसके लिए भी मौत या उम्रकैद की सजा का प्रावधान है.
  • जुर्माना: Federal Law (6) of 2023 के तहत नियमों का पालन न करने पर जेल और 50,000 से 100,000 AED तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.