UAE सरकार ने ईरान की तरफ से होने वाली आक्रामक हरकतों और उससे होने वाले नुकसान का हिसाब रखने के लिए एक नेशनल कमेटी बना दी है। यह फैसला देश के नागरिकों, वहां रहने वाले प्रवासियों और आने वाले मेहमानों को हुए नुकसान को दर्ज करने के लिए लिया गया है। सरकार अब इन सभी सबूतों को कानूनी तरीके से इकट्ठा करेगी ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय की जा सके।

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नेशनल कमेटी का गठन और इसके मुख्य नियम क्या हैं?

इस कमेटी को 7 मई 2026 को उपराष्ट्रपति और डिप्टी प्राइम मिनिस्टर शेख मंसूर बिन जायद अल नाहयान के रेजोल्यूशन नंबर (4) के तहत बनाया गया है। इस कमेटी के कामकाज के लिए कुछ खास नियम तय किए गए हैं:

  • अध्यक्ष: इस कमेटी की कमान UAE के अटॉर्नी जनरल संभालेंगे।
  • काम: यह कमेटी ईरान द्वारा किए गए हमलों, अंतरराष्ट्रीय अपराधों और उससे हुए इंसानी, आर्थिक और भौतिक नुकसान का रिकॉर्ड रखेगी।
  • मकसद: इकट्ठा किए गए सबूतों का इस्तेमाल कानूनी आधार के रूप में किया जाएगा ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके।
  • सपोर्ट: सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए एक स्पेशल टेक्निकल डेटाबेस बनाया गया है जिसमें सभी फॉरेंसिक और तकनीकी रिपोर्ट रखी जाएंगी।

ईरान के हमलों से UAE और प्रवासियों पर क्या असर पड़ा?

हाल ही में UAE पर बड़े पैमाने पर हमले हुए हैं, जिसमें 2,800 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इन हमलों ने आम जनजीवन और अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया है, जिसका असर वहां रहने वाले भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ा है:

  • मुख्य टारगेट: हमले एनर्जी प्लांट, इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दुबई के पाम जैसे बड़े इलाकों पर हुए।
  • भारतीयों पर असर: इन हमलों में 3 भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जो वहां रहने वाले प्रवासियों के लिए चिंता का विषय है।
  • अर्थव्यवस्था: हमलों की वजह से तेल का निर्यात (Oil Export) रुक गया और लोकल बिजनेस को काफी नुकसान हुआ।
  • सरकारी रुख: UAE विदेश मंत्रालय ने इसे एक खतरनाक कदम बताया है और कहा है कि देश को अपना बचाव करने का पूरा कानूनी हक है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

UAE ने यह नेशनल कमेटी क्यों बनाई है?

यह कमेटी ईरान द्वारा किए गए हमलों से हुए इंसानी, आर्थिक और भौतिक नुकसान का रिकॉर्ड रखने के लिए बनाई गई है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।

ईरान के हमलों में किन जगहों को निशाना बनाया गया?

हमलों में एनर्जी प्लांट, इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दुबई के पाम जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, जिससे तेल निर्यात और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।