UAE ने तोड़े ईरान से सभी रिश्ते, अमेरिका और ईरान की जंग में फंसा मिडिल ईस्ट, जानिए क्या है पूरा मामला.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब अपने छठे महीने में पहुंच चुका है, जिससे पूरे खाड़ी देशों में हलचल मच गई है। 19 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के बीच इस समय कोई भी सीधी बातचीत नहीं हो रही है। इस लंबी चली आ रही जंग की वजह से अमेरिकी सेना को हथियारों और पैसों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, और पेंटागन लगातार हालात को संभालने की कोशिश कर रहा है।
UAE ने ईरान से सभी व्यापारिक रिश्ते किए खत्म
क्षेत्रीय तनाव उस समय और बढ़ गया जब 19 अगस्त 2026 को संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने ईरान के साथ अपने सभी व्यापारिक और वित्तीय संबंध पूरी तरह से निलंबित कर दिए। यूएई का कहना है कि उसके इलाके में बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया था, हालांकि तेहरान ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक फर्जी साजिश बताया है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री ने साफ कह दिया है कि वे इस युद्ध को खत्म करने के लिए केवल एक बड़े और व्यापक समझौते को मानेंगे, किसी सामान्य समझौते या केवल संघर्ष विराम को नहीं।
हॉर्मूज जलडमरूमध्य और अमेरिकी प्रतिबंधों पर घमासान
ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका अपना नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता, ईरान का समुद्री जहाजों पर हमला जारी रहेगा। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका से उसकी जमी हुई संपत्ति को छोड़ने और तेल प्रतिबंधों को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी खुला है और सामान्य रूप से काम कर रहा है, जबकि ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है।
खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर कड़ी चेतावनी
ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ Ali Abdollahi ने खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि वे अमेरिकी सैन्य अभियानों में किसी भी तरह की मदद न करें। इस बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारी Michael Duffey ने पुष्टि की है कि पेंटागन इस समय अपने हथियारों के भंडार को फिर से भरने की प्रक्रिया को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। साथ ही, फारस की खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य अडes से सैनिकों को वापस बुलाने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इस उथल-पुथल के बीच लेबनान को फ्रांस की तरफ से एक सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण मिला है, जो लेबनानी सेना की मदद के लिए 17 सितंबर को आयोजित किया जाएगा।