UAE के विदेश मंत्री Sheikh Abdullah bin Zayed Al Nahyan और सिंगापुर के विदेश मंत्री Vivian Balakrishnan की अबू धाबी में मुलाकात हुई. इस बैठक में ईरान की तरफ से हुए मिसाइल हमलों और समुद्री सुरक्षा पर गंभीरता से बात की गई. दोनों देशों ने अपने रिश्तों को और मजबूत करने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर सहमति जताई.
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ईरान के हमलों और सुरक्षा पर क्या हुई बात?
मई 2026 की बैठक में ईरान द्वारा UAE और कुछ अन्य देशों पर किए गए मिसाइल हमलों के गंभीर असर पर चर्चा हुई. मंत्रियों ने बताया कि इन हमलों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा, तेल की सप्लाई और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है. सिंगापुर के मंत्री Vivian Balakrishnan ने साफ किया कि सिंगापुर UAE की संप्रभुता और यहां रहने वाले नागरिकों और पर्यटकों की सुरक्षा के साथ खड़ा है. दोनों पक्षों ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनाए रखने के प्रयासों पर जोर दिया.
UAE और Singapore के रिश्तों में क्या बदलाव आएंगे?
दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) को और गहरा करने का फैसला किया है. इसका मकसद आर्थिक तरक्की और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना है. इसके अलावा, विदेश मंत्री Vivian Balakrishnan ने 7 अप्रैल 2026 को एक अहम बात कही कि सिंगापुर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से सुरक्षित रास्ता पाने के लिए ईरान के साथ कोई मोलभाव नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और UNCLOS के तहत यह उनका अधिकार है और सिंगापुर के जहाज वहां से गुजरते रहेंगे.
गाजा और मानवीय मदद पर क्या चर्चा हुई?
- मार्च 2024 की एक पिछली बैठक में गाजा पट्टी की मानवीय स्थिति पर बात हुई थी.
- दोनों देशों ने गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए समुद्री कॉरिडोर (Maritime Corridor) पहल की समीक्षा की.
- बैठक में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम के प्रयासों को बढ़ाने पर सहमति बनी थी.
Frequently Asked Questions (FAQs)
सिंगापुर ने ईरान के बारे में क्या बयान दिया?
सिंगापुर के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों के गुजरने के लिए वे ईरान के साथ कोई बातचीत या समझौता नहीं करेंगे, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनका अधिकार है.
UAE और सिंगापुर की बैठक का मुख्य मुद्दा क्या था?
इस बैठक का मुख्य मुद्दा ईरान के मिसाइल हमलों के बाद समुद्री सुरक्षा, तेल की सप्लाई और दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना था.