UAE में रहने वाले प्रवासियों के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। ईरान के हमलों के दौरान सोशल मीडिया पर भड़काऊ बातें लिखने और वीडियो शेयर करने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। प्रशासन ने 100 से ज्यादा अकाउंट्स को हटाया है और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे यह साफ है कि इंटरनेट पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले कानून का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
UAE सरकार ने अकाउंट्स क्यों हटाए और लोगों को क्यों पकड़ा?
UAE के पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने उन सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया जो राज्य के खिलाफ संगठित अभियान चला रहे थे। ईरान के हमलों के दौरान वहां के वीडियो बनाना और उन्हें शेयर करना कानूनन गलत माना गया। इस कार्रवाई में अलग-अलग देशों के कम से कम 375 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ये लोग भ्रामक सामग्री फैला रहे थे जिससे देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा था और जनता के बीच नफरत बढ़ रही थी।
गलत पोस्ट डालने पर कितनी सजा और जुर्माना हो सकता है?
UAE के साइबर अपराध कानूनों के तहत इंटरनेट पर गलत जानकारी फैलाने वालों के लिए भारी सजा का प्रावधान है। मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
- आर्टिकल 27: कानून की अवहेलना करने या उसके खिलाफ भड़काने वालों पर 1 लाख से 5 लाख दिरहम तक का जुर्माना लग सकता है।
- आर्टिकल 23: सुरक्षा को खतरे में डालने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने वाली पोस्ट के लिए 10 लाख दिरहम तक का जुर्माना और अस्थायी जेल हो सकती है।
- आर्टिकल 52: संकट या इमरजेंसी के समय गलत खबरें या अफवाहें फैलाने पर कम से कम एक साल की जेल और 1 लाख दिरहम जुर्माना हो सकता है। अगर मामला गंभीर है तो सजा दो साल और जुर्माना 2 लाख दिरहम तक बढ़ सकता है।
साइबर हमलों और क्षेत्रीय तनाव का क्या असर हुआ?
UAE के साइबर सुरक्षा प्रमुख Mohamed Al Kuwaiti ने जानकारी दी कि देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमले तीन गुना बढ़ गए हैं। ये हमले 2 लाख से बढ़कर 6 लाख तक पहुंच गए हैं। वहीं, राष्ट्रपति के सलाहकार Anwar Gargash ने ईरान के साथ चल रहे तनाव और हमलों का जिक्र किया है। Sharjah में एक ऐसे समूह को भी पकड़ा गया है जिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।