UAE में रहने वाले लोग अब सोशल मीडिया पर कुछ भी लिखने से पहले सावधानी बरतें. यहां एक छोटा सा मजाक या व्यंग्य (sarcasm) आपको भारी मुसीबत में डाल सकता है. साइबर अपराध कानूनों के तहत अब मजाकिया कमेंट करने वालों पर 5 लाख दिरहम तक का जुर्माना लग सकता है और जेल की सजा भी हो सकती है.

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UAE के साइबर कानून और जुर्माने के नियम क्या हैं?

UAE सरकार ने ऑनलाइन मानहानि और अफवाहों को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए हैं. Federal Decree-Law No. 34 of 2021 के तहत साइबर अपराधों पर कड़ी नजर रखी जा रही है. इसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • अनुच्छेद 43: अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन ऐसा बयान देता है जिससे किसी दूसरे की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे या उसका सार्वजनिक उपहास हो, तो इसे अपराध माना जाएगा. इसमें व्यंग्यात्मक और अप्रिय टिप्पणियां भी शामिल हैं.
  • अनुच्छेद 52: ऑनलाइन गलत जानकारी फैलाने पर कम से कम एक साल की जेल और न्यूनतम 100,000 दिरहम का जुर्माना हो सकता है.
  • जुर्माने की राशि: मामले की गंभीरता के आधार पर जुर्माना 250,000 दिरहम से लेकर 500,000 दिरहम तक जा सकता है.

क्या मजाक में कही गई बात पर भी कार्रवाई होगी?

UAE का कानून हास्य और नुकसान पहुँचाने वाली सामग्री के बीच कोई अंतर नहीं करता है. अधिकारियों ने साफ किया है कि अगर आपका इरादा सिर्फ मजाक करना था, तब भी आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. Sharjah Public Prosecution ने चेतावनी दी है कि अप्रैल फूल जैसे मजाक भी अगर सार्वजनिक सुरक्षा या अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं, तो वे अपराध की श्रेणी में आएंगे.

हाल ही में एक मामला सामने आया है जहां एक महिला को Instagram पर एक हैंडबैग को “नकली” बताने वाली व्यंग्यात्मक टिप्पणी के लिए हिरासत में लिया गया था. Dubai Police के साइबर क्राइम विभाग के मेजर अब्दुल्ला अल शेही ने बताया कि ऑनलाइन लिखा गया हर शब्द एक डिजिटल निशान छोड़ता है, जिसे ट्रैक किया जा सकता है. यहां तक कि पोस्ट डिलीट करने के बाद भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अप्रैल फूल के मजाक पर जुर्माना लग सकता है?

हां, अगर अप्रैल फूल का मजाक सार्वजनिक राय को भड़काता है, घबराहट फैलाता है या सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, तो इस पर भारी जुर्माना और जेल हो सकती है.

क्या सच बात लिखने पर भी कार्रवाई हो सकती है?

UAE कानून के तहत, अगर कोई बयान तथ्यात्मक रूप से सही भी है लेकिन वह किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचाता है या उसकी गरिमा को अपमानित करता है, तो इसे मानहानि माना जा सकता है.