UAE सरकार ने साफ कह दिया है कि खाड़ी देश अब लंबे समय तक ईरान की मनमर्जी और उसके हमलों का निशाना नहीं बने रहेंगे। UAE के राष्ट्रपति के डिप्लोमैटिक एडवाइजर डॉ. अनवर गरगाश ने कहा कि ईरान शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि Gulf देश ईरान के उतार-चढ़ाव वाले रवैये को अब और नहीं झेल सकते।
बड़ी जहाजों और देशों पर हुए हमले
UAE के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने ईरान के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय ने बताया कि ईरान ने बहरीन और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसके साथ ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के एक टैंकर पर भी हमला किया गया। इन हमलों में कतर के जहाज Al Rakeyyat और सऊदी के Wedyan जैसे कमर्शियल जहाज शामिल थे। UAE इसे अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए एक बड़ा खतरा और खतरनाक कदम मान रहा है।
अमेरिका ने की जवाबी कार्रवाई
इस तनाव के बाद अमेरिका ने भी कड़ा कदम उठाया। अमेरिका ने ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर सटीक हमले किए क्योंकि उन पर कमर्शियल जहाजों पर हमले का आरोप था। इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जो अंतरिम युद्धविराम (ceasefire) हुआ था, वह अब खत्म हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया कि अब समझौता खत्म हो चुका है।
तनाव कम करने की कोशिश
भारी तनाव के बीच शांति बनाने की कोशिशें भी की गई हैं। UAE के उपराष्ट्रपति शेख मंसूर बिन जायद अल नाहयान ने ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर कालिबाफ से फोन पर बात की। दोनों नेताओं के बीच तनाव घटाने के उपायों पर चर्चा हुई। रिश्तों में गिरावट आने के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच ऐसा हाई-लेवल संपर्क हुआ है।
