UAE सरकार ने इराक़ के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया है। यह कदम उन हमलों के विरोध में उठाया गया है जो इराक़ी ज़मीन से शुरू हुए थे। मार्च महीने में UAE के दूतावास पर भी ड्रोन हमला हुआ था, जिसके बाद अब राजनयिक स्तर पर कड़ा विरोध जताया गया है।
अन्य देशों ने भी जताया विरोध
UAE के अलावा कई अन्य खाड़ी देशों और अमेरिका ने भी इसी हफ्ते इराक़ के राजनयिकों को बुलाकर अपना विरोध दर्ज कराया है। इन देशों ने इराक़ी धरती से होने वाले सुरक्षा उल्लंघनों पर चिंता जताई है।
| देश | तारीख़ | किसको बुलाया |
|---|---|---|
| UAE | 15 अप्रैल, 2026 | चार्ज डी’अफेयर्स |
| Bahrain | 13 अप्रैल, 2026 | चार्ज डी’अफेयर्स |
| Saudi Arabia | 13 अप्रैल, 2026 | राजदूत (Ambassador) |
| USA | 11 अप्रैल, 2026 | राजदूत (Ambassador) |
| Kuwait | 10 अप्रैल, 2026 | चार्ज डी’अफेयर्स |
UAE ने किन बातों पर जताया विरोध
UAE के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने एक आधिकारिक नोट भेजा है। इसमें कहा गया है कि राजनयिक मिशनों और इमारतों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। UAE ने वियना कन्वेंशन का हवाला देते हुए इराक़ी सरकार और कुर्दिस्तान रीजनल गवर्नमेंट (KRG) से इन हमलों की जांच करने को कहा है। सरकार चाहती है कि दोषियों की पहचान कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
हमलों की वजह और ताज़ा स्थिति
Institute for the Study of War (ISW) की रिपोर्ट के मुताबिक, इन ड्रोन हमलों के पीछे ईरान समर्थित इराक़ी मिलिशिया का हाथ हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ, इराक़ में शिया कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क के सदस्य एक ‘कंडीशनल ट्रूस’ यानी शर्तों वाले समझौते पर बात कर रहे हैं। इस समझौते के तहत अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों पर हमले रोकने की बात कही गई है, बशर्ते कि वे भी मिलिशिया बेस पर हमला करना बंद करें।
